नई दिल्ली: दुनिया की नजरें इन दिनों ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता पर टिकी हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से खुलासा किया है कि दोनों देशों के बीच एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग तैयार हो चुका है. इस दस्तावेज में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम, प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए फिर से खोलने जैसे बड़े मुद्दों को जगह दी गई है. हालांकि तेहरान और वॉशिंगटन में से किसी ने भी अभी तक इस रिपोर्ट पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है.
ड्राफ्ट समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और न हासिल करने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है. साथ ही यह भी तय हुआ है कि अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने मौजूदा परमाणु ढाँचे को न तो बढ़ाएगा और न ही यूरेनियम संवर्धन आगे करेगा. यह कदम वैश्विक कूटनीति के नज़रिए से बेहद अहम माना जा रहा है.
समझौते में यह भी शामिल है कि अमेरिका ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को घटाने यानी डाइल्यूशन की प्रक्रिया पर सहमत होगा. इस पर विस्तृत चर्चा अगले 60 दिनों के भीतर होगी. दोनों पक्ष मिलकर तय करेंगे कि इस यूरेनियम का क्या किया जाए, ताकि परमाणु हथियारों के खतरे को हमेशा के लिए टाला जा सके.
वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा कहे जाने वाले होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर भी ड्राफ्ट में स्पष्ट प्रावधान हैं. ईरान इसे सभी व्यापारिक जहाजों के लिए तुरंत खोलेगा, जबकि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा. इसके अलावा अंतिम समझौते तक अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और एक तय अवधि के लिए तेल बिक्री पर छूट देगा.
प्रतिबंधों के मोर्चे पर भी बड़ी राहत की उम्मीद है. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति को जारी कराने में मदद करेगा. इसके लिए नकद हस्तांतरण, क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग और फाइनेंशियल क्रेडिट लाइनों जैसे तरीके अपनाए जाएंगे. यह रकम ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि रविवार तक इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और होर्मुज़ सबके लिए खुल जाएगा. लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस समय-सीमा को नकारते हुए कहा कि हस्ताक्षर 'आने वाले दिनों में' होंगे. फिलहाल दोनों देशों ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, जिससे सस्पेंस बरकरार है.