नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है. इस युद्ध में कुछ दिनों पहले तक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी ईरान के फ्रीज फंड्स को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन को देने का प्लान कर रहे थे.
अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि ईरान के फ्रीज फंड्स को उसके द्वारा किए गए हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाए. हालांकि अब स्थिति बिल्कुल विपरीत है. खाड़ी देश अब ईरान की आर्थिक मदद के लिए आगे आ रहे हैं, ठीक उसी समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना जताई है.
अजरबैजान के समाचार माध्यम APA की रिपोर्ट के अनुसार, कतर ने ईरान को 12 अरब डॉलर के वित्तीय पैकेज की पेशकश की है. इसमें से 6 अरब डॉलर वे ईरानी संपत्तियां हैं जो कतर के बैंकों में फ्रीज हैं. शेष 6 अरब डॉलर कर्ज या क्रेडिट लाइन के रूप में दिए जा सकते हैं.
2023 के अमेरिका-ईरान समझौते के तहत पहले जारी किए गए 6 अरब डॉलर केवल मानवीय सहायता पर खर्च किए जा सकते थे, लेकिन नए पैकेज के अतिरिक्त 6 अरब डॉलर पर ईरान को अपनी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने की छूट मिल सकती है. यह प्रस्ताव क्षेत्रीय तनाव कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
इससे पहले रॉयटर्स ने खबर दी थी कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ एक अलग व्यवस्था की है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरानी हमले रोकने और तनाव घटाने के बदले UAE अरबों डॉलर की मदद देने को तैयार है. सूत्रों ने इस राशि को 10 से 20 अरब डॉलर तक बताया.
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि शुरुआती 3 अरब डॉलर पहले ही ईरान पहुंच चुके हैं. हालांकि UAE के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों का खंडन किया और उन्हें पूरी तरह झूठा व बेबुनियाद बताया. फिर भी क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से यह संकेत मिल रहे हैं कि खाड़ी देश अब ईरान के साथ आर्थिक संबंध सुधारने की दिशा में सक्रिय हो गए हैं.