नई दिल्ली: ईरान के एक बेहद शीर्ष अधिकारी ने तेहरान से मीडिया को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया है कि अमेरिका के साथ होने वाला संभावित शांति समझौता फिलहाल खटाई में पड़ गया है. दोनों महाशक्तियों के बीच चल रही बातचीत के अचानक रुकने की मुख्य वजह ईरान की वह सख्त मांग है, जिसमें उसने वैश्विक बैंकों में रोकी गई अपनी 24 अरब डॉलर की भारी-भरकम संपत्ति को तुरंत मुक्त करने की शर्त रखी है.
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के मिलिट्री एडवाइज़र मोहसेन रेज़ाई ने मौजूदा कूटनीतिक परिस्थितियों पर खुलकर बात की. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शांति की प्रक्रिया इस समय पूरी तरह ठप पड़ी है. रेज़ाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि अब इस कड़े गतिरोध को समाप्त करने की पूरी जिम्मेदारी वॉशिंगटन की है. अब गेंद पूरी तरह ट्रंप के पाले में है और उन्हें ही आगे बढ़कर पहला कदम उठाना होगा.
ईरान के सैन्य सलाहकार ने कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक फॉर्मूला भी पेश किया. तेहरान चाहता है कि शुरुआती शांति समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका पहली किस्त के रूप में 12 अरब डॉलर की राशि तुरंत अनफ्रीज करे. इसके बाद, बाकी बचे 12 अरब डॉलर समझौते के अगले चरण में जारी किए जाएं. ईरान ने इसे अमेरिका के लिए भरोसे की एक बड़ी परीक्षा करार दिया है, जिसमें वॉशिंगटन को पास होना होगा.
दूसरी तरफ, वॉशिंगटन से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी इस पूरे मामले पर बेहद सतर्कता बरत रहे हैं. व्हाइट हाउस और अमेरिकी कूटनीतिज्ञ अभी भी इस फ्रीज किए गए फंड को ईरान पर दबाव बनाए रखने का एक बेहद मजबूत और रणनीतिक हथियार मान रहे हैं. अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि बातचीत के मेज पर ठोस नतीजे आने से पहले इतनी बड़ी रकम को बिना किसी ठोस गारंटी के जारी करना जल्दबाजी होगी.
इस कूटनीतिक खींचतान के बीच ईरान ने एक बेहद आक्रामक और गंभीर सैन्य चेतावनी भी जारी की है. मोहसेन रेज़ाई ने साफ कहा कि अगर कूटनीति के रास्ते बंद होते हैं और अमेरिका दोबारा सैन्य टकराव का रास्ता चुनता है, तो वह एक बेहद अंधेरी राह पर कदम रखेगा. ऐसी स्थिति में ईरान अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा फारस की खाड़ी से आगे बढ़ाकर हिंद महासागर, लाल सागर और भूमध्य सागर तक फैला देगा, जिससे वैश्विक व्यापार संकट में आ जाएगा.
दोनो देशों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली किसी भी संभावित सीधी मुलाकात की अटकलों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है. रेज़ाई ने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण और अविश्वास के माहौल में डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर के बीच बैठक होने की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने ही इस पूरी शांति प्रक्रिया को बीच में रोका है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच गहरी खाई और चौड़ी हो गई है.