नई दिल्ली: अमेरिकी सेना ने शनिवार की आधी रात वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके ही किला से गिरफ्तार कर लिया. जिसके एक दिन बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि यूनाइटेड स्टेट्स ही वेनेजुएला को चलाएगा. हालांकि वेनेजुएला की अदालत ने इसकी जिम्मेदारी वहां की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को सौंपी थी.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कर दिया है कि अमेरिका सरकार चलाने में भूमिका नहीं निभाएगा. इसके बजाय वेनेजुएला में बदलाव लाने के लिए तेल नाकाबंदी शुरू करेगा. रुबियो ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित टैंकरों पर पहले से लगाई गई तेल क्वारंटाइन को लागू करना जारी रखेगा और उस दबाव का इस्तेमाल काराकास में अब सत्ता में बैठे लोगों से नीतिगत बदलाव लाने के लिए करेगा.
रुबियो ने सीबीएस के टीवी कार्यक्रम 'फेस द नेशन' पर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का यह मतलब था कि अमेरिका सीधा शासन नहीं करेगा बल्कि दबाव बनाएगा, जिससे ड्रग तस्करी को रोका जा सके. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका का संविधान राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह देश के किसी भी गंभीर खतरे के खिलाफ कार्रवाई कर सके. उन्होंने कहा कि यह केवल वेनेजुएला के सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है, देश में शासन करने का कोई विचार नहीं है. रुबियो के बयानो से ऐसा लग रहा था कि वह उन चिंताओं को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे विदेशी हस्तक्षेप संभव हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के बाद फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन ही अस्थायी रुप से वेनेजुएला को चलाएगा. उन्होंने कहा था कि हम देश को तब तक चलाएंगे जब तक हम एक सुरक्षित, उचित और समझदारी भरा बदलाव नहीं कर लेते. जिसके बाद विदेशी दबाव बनने शुरू होने लगे थे. जिसके बाद रुबियो ने अपने राष्ट्रपति के बयानों को सुधारते हुए कहा कि हम उनके काम का आकलन करेंगें. हालांकि उन्होंने भी वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को नकारा नहीं है. अमेरिकी गिरफ्तारी के बाद आज निकोलस मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में पहली बार पेश होंगे.