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ग्रीनलैंड पर ट्रंप का आखिरी अल्टीमेटम! बात नहीं मानने पर यूरोप को 100% टैरिफ की दी धमकी, नाटो में मचा हड़कंप

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव तेज हो गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सौदा न होने पर यूरोपीय देशों पर 100% टैरिफ की धमकी दी है, जिससे नाटो और वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ी है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का आखिरी अल्टीमेटम! बात नहीं मानने पर यूरोप को 100% टैरिफ की दी धमकी, नाटो में मचा हड़कंप
Courtesy: social media

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीति ने एक बार फिर ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में हलचल पैदा कर दी है. ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड पर कोई समझौता नहीं हुआ तो यूरोपीय देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाएंगे. इस बयान ने न केवल यूरोपीय संघ को सतर्क कर दिया है, बल्कि नाटो की एकता और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की सख्त चेतावनी

एक टीवी इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका अपने हितों से पीछे नहीं हटेगा. उनसे जब पूछा गया कि क्या वह बल प्रयोग कर सकते हैं, तो उन्होंने 'नो कमेंट' कहकर विवाद को और गहरा कर दिया. ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा रणनीति के लिए बेहद अहम है.

यूरोप पर 100% टैरिफ की धमकी

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से भारी टैरिफ लगाए जाएंगे. इसमें फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नीदरलैंड, फिनलैंड, ब्रिटेन और नॉर्वे भी शामिल हैं. इस बयान से यूरोपीय उद्योग और वित्तीय बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है.

नाटो की एकता पर मंडराता खतरा

ग्रीनलैंड विवाद ऐसे समय सामने आया है जब यूक्रेन युद्ध पहले से ही नाटो को दबाव में डाल रहा है. यूरोपीय देशों को डर है कि ट्रंप की टैरिफ नीति और क्षेत्रीय दावों से गठबंधन की एकजुटता कमजोर हो सकती है, जिससे पश्चिमी सुरक्षा ढांचा प्रभावित होगा.

नोबेल पुरस्कार से जुड़ा विवाद

ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को भेजे संदेश में नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई. उनका कहना था कि पुरस्कार न मिलने के बाद वह केवल शांति की भाषा में सोचने को बाध्य नहीं हैं. इस निजी संदेश के सार्वजनिक होने से विवाद और बढ़ गया.

डेनमार्क और ग्रीनलैंड का जवाब

डेनमार्क के विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा कि 'लोगों का व्यापार नहीं किया जा सकता.' वहीं, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भविष्य का फैसला वहां के लोग खुद करेंगे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, संवाद और सम्मान की बात दोहराई.