नई दिल्ली: ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नजर बनाए रखने और इसे अपने देश का हिस्सा बनाने की इच्छा जताई है. इसी बीच अमेरिकी सेना ने ग्रीनलैंड में लड़ाकू विमानों की तैनाती का ऐलान किया है. NORAD के अनुसार यह कदम लंबे समय से चल रही रक्षा योजनाओं का हिस्सा है और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.
NORAD ने बताया कि लड़ाकू विमान जल्द ही ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पर तैनात होंगे. यह विमान अमेरिका और कनाडा के ठिकानों से ऑपरेट किए जाएंगे. अधिकारियों ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है और मौजूदा सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है. ग्रीनलैंड में अमेरिकी एयरबेस दशकों से मौजूद है और अब तैनाती से इसकी भूमिका और मजबूत होगी.
NORAD और अमेरिकी अधिकारियों ने इस तैनाती के बारे में डेनमार्क सरकार और ग्रीनलैंड प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया था. हालांकि विमानों के आगमन की सटीक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है. यूरोप के देशों ने इस कदम पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है क्योंकि ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर ने यूरोपीय सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन को चुनौती दी है.
डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. उनका मानना है कि आर्कटिक द्वीप यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण कनेक्शन रखता है. ट्रंप ने विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिससे अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव और बढ़ गया है.
ग्रीनलैंड की सुरक्षा डेनमार्क के पास है, लेकिन अमेरिकी और कनाडाई संयुक्त हवाई रक्षा कमांड (NORAD) दशकों से आर्कटिक क्षेत्र की निगरानी कर रही है. अमेरिकी जेट की तैनाती NORAD की सुरक्षा गतिविधियों का हिस्सा है और आर्कटिक में अमेरिकी प्रभुत्व को मजबूत करेगी.
ग्रीनलैंड में अमेरिकी विमान तैनाती से आर्कटिक में सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है. यह कदम क्षेत्रीय रणनीति और सैन्य संतुलन में बदलाव ला सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में अमेरिका, डेनमार्क और यूरोप के बीच बातचीत और तनाव जारी रह सकता है.