नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख अपनाया है. शुक्रवार को उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की योजना का समर्थन नहीं करेंगे, उन पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं. ट्रंप लंबे समय से इस स्वशासित क्षेत्र को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताते रहे हैं. इस बयान ने यूरोप और नाटो देशों में हलचल बढ़ा दी है.
डोनाल्ड ट्रंप कई महीनों से ग्रीनलैंड को लेकर बयान देते आ रहे हैं. उनका कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र में स्थित यह द्वीप अमेरिका की सुरक्षा रणनीति के लिए बेहद जरूरी है. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि टैरिफ किन देशों पर और किस स्तर तक लगाए जाएंगे. इसके बावजूद उनका बयान कूटनीतिक दबाव के तौर पर देखा जा रहा है.
व्हाइट हाउस पहले ही कह चुका है कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हैं. लेकिन यह पहला मौका है जब ट्रंप ने सीधे तौर पर आर्थिक प्रतिबंधों की बात की है. इससे पहले उनके बयान अधिकतर रणनीतिक और सुरक्षा जरूरतों तक सीमित थे. टैरिफ की धमकी से संकेत मिलता है कि अमेरिका सहयोग न करने वाले देशों पर दबाव बढ़ा सकता है.
ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा है और वहां की सरकार इस मुद्दे पर सतर्क है. हाल ही में यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सीमित संख्या में सैनिक भेजे हैं. डेनमार्क ने साफ किया है कि वह द्वीप की सुरक्षा के लिए नाटो की बड़ी और स्थायी मौजूदगी की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
रॉयटर्स के अनुसार, यूरोपीय देशों की सैन्य मौजूदगी का मकसद ग्रीनलैंड में सुरक्षा अभ्यास की तैयारी में मदद करना भी है. यह कदम अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की बैठक के बाद उठाया गया. इससे साफ है कि ग्रीनलैंड अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मुद्दा बन चुका है.
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का ताजा बयान वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ा सकता है. जहां अमेरिका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहा है, वहीं यूरोपीय देश इसे संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों से जोड़कर देख रहे हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिका और उसके सहयोगियों के रिश्तों की भी परीक्षा ले सकता है.