नई दिल्ली: बांग्लादेश की मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार एक बार फिर विवादों के घेरे में है. इस बार मामला भाई-भतीजावाद और कट्टरपंथी ताकतों को संरक्षण देने से जुड़ा है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यूनुस सरकार ने मारे गए भारत विरोधी नेता शरीफ उस्मान हादी के भाई, उमर बिन हादी को यूनाइटेड किंगडम में एक राजनयिक पद देने के लिए नियमों को ताक पर रखकर एक नया पद सृजित किया है.
लोक प्रशासन मंत्रालय की 15 जनवरी की अधिसूचना के मुताबिक, उमर बिन हादी को बर्मिंघम में बांग्लादेश सहायक उच्चायोग में द्वितीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि बर्मिंघम मिशन में पहले से ऐसा कोई पद स्वीकृत ही नहीं था. सूत्रों का दावा है कि उमर को जगह देने के लिए यह पद विशेष रूप से चुपचाप बनाया गया है.
उमर बिन हादी के भाई, शरीफ उस्मान हादी, कट्टरपंथी संगठन इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे. वह अपने भारत विरोधी बयानों के लिए जाने जाते थे और 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी. दिसंबर 2025 में हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर भारत विरोधी भावनाएं भड़काई गईं. इस्लामी समूहों ने बिना किसी सबूत के इस हत्या का आरोप भारत पर मढ़ा था, जिसके बाद ढाका में भारतीय दूतावासों को निशाना बनाने की कोशिश की गई.
हादी को ढाका विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कवि काजी नजरूल इस्लाम के बगल में दफनाया गया, जिसे कई बुद्धिजीवियों ने बांग्लादेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ माना. अब उनके भाई की राजनयिक नियुक्ति को उसी तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि उमर बिन हादी ने खुद अपने भाई की मौत के लिए यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति उन कट्टरपंथी ताकतों और जमात से जुड़े समूहों को शांत करने का एक संकेत है, जिन्होंने यूनुस को सत्ता तक पहुँचाने में मदद की थी.
इस नियुक्ति ने यूनुस प्रशासन के उस वादे पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमें उन्होंने 'भ्रष्टाचार मुक्त' और 'निष्पक्ष' बांग्लादेश बनाने की बात कही थी. क्या एक कट्टरपंथी विचारधारा वाले परिवार के सदस्य को विदेश मिशन में जगह देना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की छवि को प्रभावित नहीं करेगा. वहीं सबसे बड़ा सवाल क्या यह कदम भारत-बांग्लादेश के पहले से तनावपूर्ण संबंधों में और कड़वाहट पैदा करेगा.