नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो की मुलाकात के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद सामने आया है. माचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल सौंप दिया. इस प्रतीकात्मक कदम को उन्होंने स्वतंत्रता के लिए ट्रंप की प्रतिबद्धता की पहचान बताया. हालांकि इस घटना के बाद नोबेल समिति, नॉर्वे और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.
व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान मारिया कोरीना माचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को सौंपा. उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के लिए ट्रंप की भूमिका का सम्मान बताया. बाद में फॉक्स न्यूज से बातचीत में माचाडो ने कहा कि यह पल बेहद भावुक था और ट्रंप इस सम्मान के हकदार हैं. ट्रंप ने भी इसे आपसी सम्मान का प्रतीक बताया.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि माचाडो ने मेडल उन्हें संभाल कर रखने के लिए दिया है. उन्होंने इसे एक शानदार जेस्चर कहा. ट्रंप पहले भी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने दुनिया में कई युद्ध रुकवाने की कोशिश की और इसी आधार पर नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य हैं. हालांकि वे अब तक इस पुरस्कार के आधिकारिक विजेता नहीं रहे हैं.
नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट और नोबेल समिति ने तुरंत स्थिति स्पष्ट की. समिति ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार को न तो ट्रांसफर किया जा सकता है और न ही किसी और को सौंपा जा सकता है. यह नियम अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत और नोबेल फाउंडेशन के नियमों में साफ दर्ज है. माचाडो ही 2025 की आधिकारिक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रहेंगी.
The #NobelPeacePrize medal.
— Nobel Peace Center (@NobelPeaceOslo) January 15, 2026
It measures 6.6 cm in diameter, weighs 196 grams and is struck in gold. On its face, a portrait of Alfred Nobel and on its reverse, three naked men holding around each other’s shoulders as a sign of brotherhood. A design unchanged for 120 years.
Did… pic.twitter.com/Jdjgf3Ud2A
इस घटना पर नॉर्वे में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली. संसद सदस्य ट्रिग्वे स्लाग्सवोल्ड वेदुम ने कहा कि ट्रंप दूसरों के पुरस्कारों से खुद को सजाने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व मंत्री जेन हॉलैंड मातलारी ने इसे अभूतपूर्व और सम्मानहीन बताया. नॉर्वेजियन पीपुल्स एड के प्रमुख रेमंड योहानसन ने इसे नोबेल पुरस्कार की साख के लिए नुकसानदेह करार दिया.
सोशल मीडिया पर भी इस कदम की आलोचना हुई. पूर्व अमेरिकी राजदूत माइकल मैकफॉल ने सवाल उठाया कि ट्रंप को शर्म क्यों नहीं आई. कई यूजर्स ने इसे पुरस्कार का मजाक बताया. हालांकि कुछ लोगों ने माचाडो का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक भावनात्मक और मानवीय इशारा था. विवाद के बावजूद ट्रंप ने वेनेजुएला नीति में अपना रुख नहीं बदला है.