अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. हालिया घटनाक्रम ने मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. वाशिंगटन ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है, जिसके बाद तेहरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. दोनों देशों के बयान संकेत दे रहे हैं कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.
इस पूरे घटनाक्रम की वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुई एक घटना को बताया जा रहा है. अमेरिका का कहना है कि उसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की, जबकि ईरान ने भी जवाबी रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. ऐसे में क्षेत्र में तनाव फिर चर्चा का विषय बन गया है.
तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 37 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया, जिसमें ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई की झलक दिखाई गई. अमेरिका के अनुसार, यह हमला ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों तथा तटीय रडार चौकियों को निशाना बनाकर किया गया. वाशिंगटन ने कहा कि यह कार्रवाई 25 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सिंगापुर के ध्वज वाले मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली पर हुए कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई.
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— U.S. Central Command (@CENTCOM) June 27, 2026Also Read
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि 25 जून को सिंगापुर के ध्वज वाला मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली ओमान तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था. इसी दौरान उस पर एकतरफा ड्रोन हमला हुआ. अमेरिका का आरोप है कि यह हमला ईरान की ओर से किया गया और इसी के जवाब में उसके लड़ाकू विमानों ने मिसाइल व ड्रोन भंडारण स्थलों के साथ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया.
अमेरिकी बयान में कहा गया कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला युद्धविराम की भावना के खिलाफ है और इससे नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित होती है. सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए लगातार तैनात है. इसी के साथ अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वह दोनों देशों के बीच हुए समझौते के पालन पर भी नजर बनाए हुए है.
अमेरिकी हमलों के कुछ समय बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. सरकारी मीडिया के जरिए जारी संदेश में कहा गया कि यदि अमेरिका ने दोबारा ऐसी सैन्य कार्रवाई की तो जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा. वहीं दक्षिणी बंदरगाह क्षेत्र में विस्फोट की आवाज सुनाई देने की भी स्थानीय स्तर पर जानकारी सामने आई, हालांकि अमेरिकी पक्ष ने हमलों के सटीक स्थान का खुलासा नहीं किया.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि ईरान यदि किसी भी तरह की नई सैन्य कार्रवाई करता है तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से किया जा सकता है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा. वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले को युद्धविराम का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन बताया और कहा कि एक ड्रोन जहाज के ऊपरी हिस्से से टकराया, जबकि तीन अन्य ड्रोन को मार गिराया गया.
Iran signed a ceasefire agreement. We have honored it. If they have disagreements about how the MOU is being applied, they can pick up the phone.
— JD Vance (@JDVance) June 26, 2026
But violence will be met with violence. https://t.co/VWnBS1PWaV
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन क्षेत्र में बीच-बीच में सैन्य घटनाएं सामने आती रही हैं. 17 जून को दोनों देशों के नेताओं ने युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी. इसी सिलसिले में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता का पहला दौर भी पूरा हो चुका है, लेकिन हालिया घटनाओं ने एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है.