नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ी और अप्रत्याशित घोषणा करते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों और पावर प्लांट्स पर सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाए. यह कदम पिछले तीन हफ्तों से जारी युद्ध के बीच शांति की एक महत्वपूर्ण उम्मीद बनकर उभरा है. ट्रंप ने ईरान के साथ हुई हालिया वार्ताओं को 'सकारात्मक' बताया है. इस फैसले का उद्देश्य मध्य पूर्व में चल रही शत्रुता का पूर्ण समाधान खोजना है.
सोमवार शाम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस सैन्य विराम की घोषणा की. गौर करने वाली बात यह रही कि शाम 4.35 बजे किए गए अपने पहले पोस्ट को हटाकर उन्होंने 4.53 बजे कुछ मामूली सुधारों के साथ दोबारा पोस्ट किया. उनके सिग्नेचर 'ऑल-कैप्स' स्टाइल में लिखे इस संदेश ने वैश्विक राजनयिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध विभाग को फिलहाल किसी भी हमले को टालने का आदेश दे दिया गया है.
पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच गहन और विस्तृत चर्चा हुई है. ट्रंप ने इन वार्ताओं को रचनात्मक बताते हुए कहा कि दोनों पक्ष मध्य पूर्व में संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में बात कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने बातचीत के विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं. लेकिन उनके लहजे से कूटनीतिक सकारात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.
ट्रंप ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि ईरानी पावर प्लांट्स और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर सभी सैन्य हमले पांच दिनों की अवधि के लिए टाल दिए जाएं. यह स्थगन वर्तमान में चल रही बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगा. राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया है कि यदि आगामी बातचीत सार्थक रहती है. तो इस शांति की अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है. यह फैसला क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस घोषणा पर ईरान की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया आई है. अफगानिस्तान में स्थित ईरानी दूतावास ने दावा किया कि ट्रंप ने यह फैसला ईरान की 'कड़ी चेतावनी' के बाद लिया है. वहीं ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने इस पूरे घटनाक्रम को 'ट्रंप का पीछे हटना' करार दिया है. ईरान का मानना है कि उनकी सैन्य तैयारी और निरंतर दबाव के कारण अमेरिका को अपने सख्त रुख में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा है.