menu-icon
India Daily

'10 दिन में फैसला लेंगे ट्रंप', भारत, चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने को लेकर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून पर फैसला ले सकते हैं. 

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'10 दिन में फैसला लेंगे ट्रंप', भारत, चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने को लेकर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान
Courtesy: X

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों के भीतर यह तय कर सकते हैं कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाए या नहीं. इसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर भी पड़ सकता है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह जानकारी दी. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इस मामले में अंतिम फैसला ट्रंप को लेना है.

रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई का प्रावधान

गोर ने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों या मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में दूसरों की मदद करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार मिलता है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया है.

गोर के मुताबिक, कानून को अमेरिकी सीनेट में व्यापक समर्थन मिला था. कुल 100 में से 86 सीनेटरों ने इसके पक्ष में मतदान किया. उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसी देश को दंडित करना नहीं, बल्कि युद्ध समाप्त करने की दिशा में दबाव बनाना है.

भारत को राहत मिलेगी या नहीं?

भारत को प्रस्तावित प्रतिबंधों से छूट मिलने के सवाल पर गोर ने कहा कि इसका फैसला ट्रंप ही करेंगे. उन्होंने यह भी माना कि देश अपनी मौजूदा ऊर्जा आपूर्ति को तुरंत बंद नहीं कर सकते. अमेरिकी प्रशासन अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर रूस के युद्ध प्रयासों तक पहुंचने वाले धन के प्रवाह को धीरे-धीरे कम करना चाहता है. हालांकि, इस कानून के तहत भारत पर कार्रवाई होगी या उसे कोई राहत मिलेगी, इस बारे में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी

गोर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए. उन्होंने कहा कि बातचीत में बड़े मुद्दों और व्यापक रूपरेखा पर काफी प्रगति हुई है. अब कुछ छोटे मुद्दों को सुलझाने के साथ चर्चा के दौरान सामने आने वाले नए विषयों पर काम किया जा रहा है.

करीब डेढ़ साल से चल रही बातचीत को उन्होंने अन्य व्यापार समझौतों की तुलना में तेज बताया. गोर के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के समझौते के आधार में इस्तेमाल किए गए कानून को असंवैधानिक ठहराए जाने के बाद प्रशासन को व्यवस्था के कुछ हिस्सों पर दोबारा काम करना पड़ा.

रक्षा, चिप और एआई में सहयोग बढ़ाने की तैयारी

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि दोनों देश रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में कारोबारी संबंध मजबूत कर सकते हैं. भारत में अमेरिकी कंपनियों का निवेश बढ़ने से अमेरिका में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.

गोर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास के लिए भारत को एक बेहतर संभावनाओं वाला देश बताया. उनके मुताबिक, भारतीय कंपनियों और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के बीच साझेदारी से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है.