ईरान ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के खिलाफ अपना रुख सख्त कर लिया है. एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की यह तकनीक अब ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बहस के केंद्र में है. ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि इस सेवा का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों, जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है. इसी आधार पर सरकार ने स्टारलिंक के इस्तेमाल और उसके उपकरणों की खरीद-बिक्री पर कड़ी सजा की चेतावनी दी है.
ईरान में स्टारलिंक का इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर दो साल तक की जेल हो सकती है. वहीं, इसके टर्मिनल का आयात करने या उन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाने पर पांच साल तक की सजा का प्रावधान है. मामला अगर जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों तक पहुंचता है, तो दोषी को मौत की सजा भी दी जा सकती है. इस चेतावनी से साफ है कि ईरान इस तकनीक के इस्तेमाल को बेहद गंभीरता से ले रहा है.
ईरान की सुप्रीम नेशनल साइबरस्पेस काउंसिल के सचिव मोहम्मद अमीन आघामिरी ने दावा किया है कि देश के पास स्टारलिंक टर्मिनलों का संपर्क काटने के कई सिस्टम हैं. उनके मुताबिक, इनमें से एक प्रणाली का इस्तेमाल जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस तकनीक को अपने सहयोगी देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है. इससे संकेत मिलता है कि तेहरान इस चुनौती से निपटने के लिए अपने तरीके दूसरे देशों तक भी पहुंचाना चाहता है.
स्टारलिंक की सेवाओं को बाधित करने के लिए ईरान पहले भी जैमर, जीपीएस सिग्नल में गड़बड़ी और छापेमारी जैसे तरीके अपना चुका है. इस इंटरनेट सेवा ने प्रदर्शनकारियों को सरकारी पाबंदियों के बीच भी जानकारी साझा करने का रास्ता दिया है. यही वजह है कि ईरानी सरकार इसे अपने सूचना नियंत्रण के लिए खतरा मानती है. अब कड़ी सजा की चेतावनी के जरिए सरकार इस तकनीक के इस्तेमाल को रोकने का प्रयास कर रही है.
स्टारलिंक को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब यूक्रेन में इसकी सेवा रोके जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ाई है. खबर में दिए गए विवरण के मुताबिक, रूस के साथ तेल को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डील के बाद यूक्रेन को मिलने वाली स्टारलिंक सेवा पर रोक लगी. इसके बाद यूक्रेन के ड्रोन की गति प्रभावित होने के दावे किए गए. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस पर चिंता जताई है. इस पूरे घटनाक्रम ने दिखाया है कि सैटेलाइट इंटरनेट अब केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि युद्ध और सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है.