रूस नहीं अब फ्रांस बना भारत के लिए सबसे बड़ा हथियार मार्केट, भारी मात्रा में हो रही खरीदारी! SIPRI रिपोर्ट में खुलासा
SIPRI ने अपना नया रिपोर्ट पेश किया है. जिसके मुताबिक भारत अब रूस नहीं बल्कि फ्रांस पर हथियार के लिए ज्यादा निर्भर बताया गया.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अंतरराष्ट्रीय हथियारों के हस्तांतरण को लेकर ताजा रिपोर्ट जारी किया है. इस रिपोर्ट में भारत के हथियार इम्पोर्ट में बड़े बदलाव नजर आ रहे हैं. दुनिया में चल रहे जंग के माहौल में भारत दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदार के रूप में नजर आ रहा है. वहीं यूक्रेन पहले नंबर पर नजर आ रहा है.
SIPRI की यह रिपोर्ट 2020-24 के अवधि के बीच की गई खरीदारी पर आधारित है. भारत अभी भी अपने कुल हथियार आयात का 36% रूस से करता है. हालांकि पहली की तुलना में अब यह संख्या काफी कम है. 2015-19 के बीच भारत अपना हथियार रूस से 55% खरीदता था. वहीं 2010-14 के बीच यह डेटा 72% तक था. लेकिन धीरे-धीरे अब भारत रूस से मोहभंग करता जा रहा है.
फ्रांस बना भारत का दूसरा बड़ा सप्लायर
रूस के बजाए अब पश्चिमी देशों पर निर्भरता बढ़ गई है. फ्रांस अब भारत का दूसरा बड़ा सप्लायर बन गया है. फ्रांस के कुल निर्यात का 28% भारत को जाता है. फ्रांस 2020-24 में वैश्विक हथियार निर्यात में दूसरे नंबर पर है. वहीं भारत फ्रांस का सबसे बड़ा खरीददार है. हालांकि रूस का भी सबसे बड़ा खरीददार भारत ही है.
यूक्रेन और रूस के बीच पिछले चार सालों से जंग जारी है. जिसका नतीजा यह हुआ है कि यूक्रेन अब दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है. इसका वैश्विक हिस्सा 8.8% है, 2015-19 में यह सिर्फ 0.1% था. वहीं भारत का हिस्सा 8.3% है. दोनों मिलकर वैश्विक आयात में बड़ा योगदान देते हैं.
क्या है अमेरिका का हाल?
अमेरिका वैश्विक हथियार निर्यात में पहले नंबर पर है, इसका हिस्सा 43% है. 2015-19 के मुकाबले इमसें 21% की बढ़ोतरी हुई है. अमेरिका ने रूस के पुराने ग्राहकों को अपनी ओर खींचा है. अमेरिका इस समय यूक्रेन, जर्मनी और ब्रिटेन मुख्य सप्लायर हैं. यूरोप में भी पिछले 5 सालों में हथियार आयात 155% बढ़ा है. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है.
रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोपीय देश डर का माहौल है. पोलैंड, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देश अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च कर रहे हैं. वहीं अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात करें तो यहां 2020-24 में 81% हथियार चीन से आए, 2015-19 में यह 74% था. पाकिस्तान का आयात 61% बढ़ा है. रिपोर्ट में यह साफ बताया गया कि विश्व में हथियार की मांग बढ़ रही है, जिससे तनाव का खतरा और भी ज्यादा है.
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