अमरावती: आंध्र प्रदेश के एम्स मंगलागिरी के हॉस्टल में डायरिया और उल्टी के अचानक फैलने से हड़कंप मच गया है. इस घटना में 25 छात्र और स्टाफ सदस्य बीमार हो गए हैं. सभी प्रभावित लोगों को अस्पताल के विशेष वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं.
जानकारी के अनुसार हॉस्टल में रहने वाले छात्रों और कर्मचारियों ने तीन दिन पहले अचानक तेज उल्टी और डायरिया की शिकायत की थी. शुरू में कुछ मामलों को सामान्य माना गया था, लेकिन जब लगातार कई लोग बीमार होने लगे तो स्थिति गंभीर हो गई. इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत चिकित्सा टीमों को सक्रिय कर दिया.
बीमार पड़े सभी छात्रों और कर्मचारियों को एम्स मंगलागिरी के एक विशेष वार्ड में भर्ती किया गया है. यहां डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं और जरूरी उपचार दिया जा रहा है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सभी मरीजों की हालत स्थिर है लेकिन उन्हें सावधानी के तौर पर निगरानी में रखा गया है.
अधिकारियों को शक है कि इस बीमारी के फैलने की वजह दूषित पानी हो सकता है. इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पानी की आपूर्ति प्रणाली की जांच शुरू कर दी है. जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं पानी के स्रोत, स्टोरेज टैंक या पाइपलाइन में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है.
मामले की जांच के लिए करीब 40 पानी के नमूने हॉस्टल के अलग अलग स्थानों से लिए गए हैं. इन नमूनों को प्रयोगशाला में भेजा गया है जहां यह जांच की जा रही है कि उनमें कोई बैक्टीरिया, वायरस या रासायनिक अशुद्धि तो नहीं है. रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के असली कारण का पता चल सकेगा.
एम्स मंगलागिरी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. हॉस्टल में फिलहाल सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. साथ ही साफ सफाई और सैनिटाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके.
अधिकारियों ने हॉस्टल में रहने वाले अन्य छात्रों और कर्मचारियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है. किसी को भी उल्टी या डायरिया के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत मेडिकल टीम को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके.