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हवाई जहाज छोड़ ‘घोस्ट ट्रेन’ से क्यों चलते हैं पुतिन? जानें अदृश्य सुरक्षा कवच का पूरा राज

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए एक बेहद उन्नत ‘घोस्ट ट्रेन’ का उपयोग करते हैं, जो न केवल लक्जरी सुविधाओं से सुसज्जित है बल्कि ट्रैकिंग और निगरानी से बचने के लिए विशेष तकनीक से तैयार की गई है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
हवाई जहाज छोड़ ‘घोस्ट ट्रेन’ से क्यों चलते हैं पुतिन? जानें अदृश्य सुरक्षा कवच का पूरा राज
Courtesy: social media

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दुनिया के उन नेताओं में शामिल हैं जिनकी सुरक्षा व्यवस्था और निजी जीवन सबसे अधिक रहस्य से भरे माने जाते हैं. अक्सर यह सवाल उठता है कि वे हमेशा सार्वजनिक रूप से कम क्यों दिखते हैं और उनकी हर यात्रा को इतनी गोपनीयता में क्यों रखा जाता है. 

भारत के दौरे पर फिर से यह चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पुतिन की उस ‘घोस्ट ट्रेन’ को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं, जो उनकी सुरक्षा कवच जैसी मानी जाती है.

पुतिन की रहस्यमयी ट्रेन

पुतिन की इस खास ट्रेन को ‘घोस्ट ट्रेन’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आम ट्रेनों की तरह रेलवे सिस्टम में दर्ज नहीं होती. इससे उनके ठिकाने का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है. रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ सालों से पुतिन घरेलू यात्राओं के लिए विमान के बजाय इसी ट्रेन का इस्तेमाल अधिक कर रहे हैं.

क्यों कहा जाता है इसे ‘घोस्ट ट्रेन’?

यह ट्रेन ट्रैकिंग से बचने के लिए डिजाइन की गई है. जहां विमान उड़ान भरते ही रडार पर आ जाते हैं, वहीं इस ट्रेन का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं होता. शौकिया ट्रेन स्पॉटर्स ने इसे दो लोकोमोटिव और एक सफेद गुंबद के आधार पर पहचानना सीख लिया है, जो उन्नत संचार एंटेना का संकेत है.

ट्रेन के अंदर की शाही दुनिया

लीक दस्तावेजों के अनुसार, ट्रेन के 20 से अधिक डिब्बों में जिम, मसाज रूम, कॉस्मेटोलॉजी सेंटर, तुर्की स्टीम बाथ और उच्च तकनीक वाले बाथरूम शामिल हैं. इसे इस तरह बनाया गया है कि पुतिन लंबे दौरों के दौरान भी पूरी सुविधा और गोपनीयता के साथ काम कर सकें.

सुरक्षा के कड़े घेरे में तैयार की गई ट्रेन

ट्रेन का हर हिस्सा रूसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSO) की निगरानी में तैयार और संचालित होता है. कैरिज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी भी प्रकार के सुनने वाले उपकरण या जासूसी तकनीक का असर न हो सके. यह पूरी तरह से ‘सुरक्षा का चलता-फिरता किला’ है.

600 करोड़ की लागत वाली ‘भूतिया ट्रेन’

रिपोर्टों में कहा गया है कि इस सुपर-सिक्योर ट्रेन को बनाने में लगभग 74 मिलियन डॉलर- यानी भारतीय मुद्रा में 600 करोड़ रुपये से अधिक- की लागत आई है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेन पुतिन की सुरक्षा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर उन दिनों में जब रूस अंतरराष्ट्रीय निगरानी के केंद्र में रहता है.