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India Daily

'परमाणु हथियार ही सुरक्षा की...', पुतिन के करीबी के बयान से दुनिया में मचा हड़कंप; जानें क्या बोले मेदवेदेव

रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात में परमाणु हथियार ही सुरक्षा की पक्की गारंटी हैं. उनके बयान ने परमाणु हथियारों की नई होड़ को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'परमाणु हथियार ही सुरक्षा की...', पुतिन के करीबी के बयान से दुनिया में मचा हड़कंप; जानें क्या बोले मेदवेदेव
Courtesy: social media

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति में तनाव के बीच रूस के पूर्व राष्ट्रपति और व्लादिमीर पुतिन के करीबी दिमित्री मेदवेदेव का एक बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. परमाणु हथियारों को लेकर दिए गए उनके बयान ने न केवल पश्चिमी देशों को चौंकाया है, बल्कि दुनिया को एक बार फिर परमाणु असंतुलन की आशंका की ओर धकेल दिया है. मेदवेदेव के मुताबिक मौजूदा हालात में देशों के लिए सुरक्षा का सबसे ठोस आधार परमाणु शक्ति ही बनती जा रही है.

मेदवेदेव के बयान से मची हलचल

रूसी सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने परमाणु हथियारों को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी. उन्होंने कहा कि रूस ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को परमाणु हथियारों के दम पर ही सुरक्षित रखा है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है.

परमाणु हथियारों की नई होड़ की आशंका

रूसी अखबार कोमर्सेंट को दिए इंटरव्यू में मेदवेदेव ने कहा कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता के कारण कई देश परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा हालात में इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ देश अपनी रक्षा के लिए परमाणु शक्ति को जरूरी मानने लगें. इससे वैश्विक सुरक्षा संतुलन और ज्यादा कमजोर हो सकता है.

'सुरक्षा की एकमात्र गारंटी'

मेदवेदेव ने कहा कि सामूहिक विनाश के हथियार, यानी परमाणु हथियार, फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे मजबूत गारंटी बन चुके हैं. उन्होंने माना कि यह मानवता के हित में नहीं है, लेकिन वास्तविकता यही है कि अब तक इंसान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा का इससे बेहतर विकल्प नहीं खोज पाया है. उनके अनुसार कई देशों के पास सैन्य तकनीक है और कुछ इस दिशा में शोध भी कर रहे हैं.

अमेरिका और यूरोप पर लगाए आरोप

अपने बयान में मेदवेदेव ने अमेरिका और यूरोपीय देशों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ओर से लगातार उकसावे वाली कार्रवाइयां की जा रही हैं, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं. उनका आरोप है कि यही रवैया वैश्विक तनाव को बढ़ा रहा है और देशों को सैन्य ताकत बढ़ाने की ओर धकेल रहा है.

START संधि पर रूस की चिंता

दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिका और रूस के बीच न्यू START संधि का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संधि की समयसीमा एक साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वाशिंगटन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है. रूसी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका के पास 5 फरवरी तक इस प्रस्ताव पर फैसला लेने का समय है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है.