नई दिल्ली: भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है. सैन्य मोर्चे पर झटका खाने के बाद पाकिस्तानी सेना और आतंकी संगठनों के रिश्तों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं. हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आतंकियों ने न केवल भारत को धमकियां दीं, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि उन्हें पाकिस्तानी सेना का खुला समर्थन हासिल है. इन बयानों ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर के इरादों पर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिका दी हैं.
सीएनएन न्यूज-18 द्वारा जारी एक वीडियो में दावा किया गया है कि रहीम यार खान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा से जुड़े आतंकियों ने खुलेआम बयानबाजी की. मंच से आतंकियों ने स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना उन्हें समर्थन देती है. इस कबूलनामे ने पाकिस्तान के उस दावे की पोल खोल दी, जिसमें वह खुद को आतंकवाद से दूर बताता रहा है.
जमात-उद-दावा के आतंकी अताउल्लाह घिलजई ने अपने भाषण में भारत के खिलाफ जहर उगला. उसने कहा कि वे भारत का नक्शा बदलने की क्षमता रखते हैं और इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं. घिलजई ने दावा किया कि वे पाकिस्तानी सेना के साथ तालमेल बनाकर काम कर रहे हैं और सेना व नेताओं को अपनी विचारधारा के समर्थन के लिए आमंत्रित कर चुके हैं.
लश्कर के टॉप कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने न केवल जिहादी सोच को दोहराया, बल्कि पाकिस्तान की राजनीति में उतरने का भी ऐलान कर दिया. उसने कहा कि मदरसों से प्रशिक्षित तालिबान जैसे लड़ाकों की जरूरत है, न कि डॉक्टरों और इंजीनियरों की. कसूरी ने दावा किया कि मदरसे के छात्र जिहाद के लिए तैयार हैं और दुनिया उनसे डर रही है.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, ये बयान ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आए हैं, जिससे साफ होता है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व दबाव में है. माना जा रहा है कि आतंकियों को आगे कर भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान के भीतर उपजे असंतोष से ध्यान हटाया जा सके और कश्मीर मुद्दे को फिर हवा दी जा सके.
आतंकियों के बयानों के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि सेना और आतंकी संगठनों के बीच की दूरी सिर्फ दिखावे की है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए ये बयान खुद उसके खिलाफ सबूत बनते जा रहे हैं.