प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक में शामिल हुए. बैठक के दौरान उन्होंने उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं तथा उनके परिवार के सदस्यों को भारत की अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी पारंपरिक वस्तुएं उपहार में दीं.
पीएम मोदी ने इन उपहारों के जरिए भारत की अपनी विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक दुनिया के सामने पेश किया. साथ ही मध्य एशियाई देशों के साथ अपने पुराने सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत करने का संदेश दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव को आगरा की प्रसिद्ध संगमरमर जड़ाई वाली सजावटी प्लेट भेंट की. सफेद संगमरमर पर नीले, हरे और लाल रंग के फूल-पत्तियों के डिजाइन वाली यह कलाकृति भारतीय कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी कला को दर्शाती है.
इसके साथ राष्ट्रपति मिर्जियोयेव को कांगड़ा की खास चाय के दो डिब्बे भी दिए गए. इनमें कांगड़ा फर्स्ट फ्लश काली चाय और कांगड़ा हरी चाय शामिल थी. दोनों चाय को नक्काशीदार लकड़ी के डिब्बों में रखा गया था. कांगड़ा चाय हिमाचल प्रदेश की पहचान मानी जाती है और इसकी खेती 19वीं सदी से होती आ रही है.
मिर्जियोयेव को चंदन से बना शततंत्री वाद्य भी भेंट किया गया, जिसे संतूर के नाम से जाना जाता है. जम्मू-कश्मीर से जुड़े इस पारंपरिक वाद्य की कई तारों वाली बनावट उज्बेकिस्तान के पारंपरिक वाद्य चांग से मिलती है. इस समानता के जरिए दोनों देशों की संगीत परंपराओं के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने रखा गया.
प्रधानमंत्री ने उन्हें उज्बेक ग्रैंडमास्टर जावोखिर सिंदारोव की 2025 विश्व कप फाइनल की मूल हस्तलिखित स्कोरशीट भी दी. सिंदारोव ने फाइनल में चीन के वेई यी को हराकर सबसे कम उम्र के विश्व कप विजेता बनने का गौरव हासिल किया था.
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए इन उपहारों में भारत के अलग-अलग राज्यों की कला, शिल्प, वस्त्र, संगीत, साहित्य और खानपान की झलक दिखाई दी. आगरा की संगमरमर जड़ाई, वाराणसी की बुनाई, हिमाचल की चाय, जम्मू-कश्मीर का संतूर और लद्दाख की पारंपरिक कला के जरिए भारत ने अपनी सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा.