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'भारत बेहतर विकल्प होता', पाकिस्तान की मध्यस्थता को एक्सपर्ट ने अमेरिका के लिए बताया शर्मिंदगी

अमेरिकी थिंक टैंक के विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को अमेरिका के लिए शर्मिंदगी और खतरा बताया. उन्होंने कहा कि भारत इस भूमिका के लिए कहीं बेहतर विकल्प होता. ट्रंप के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत की मध्यस्थता करने जा रहा है, लेकिन इस भूमिका को लेकर अमेरिका में तेज बहस छिड़ गई है. अमेरिकी एक्सपर्ट माइकल रुबिन ने साफ कहा है कि पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी देना अमेरिका के लिए शर्म की बात है. उन्होंने पाकिस्तान की पिछली हरकतों को याद दिलाते हुए भारत को बेहतर विकल्प बताया. ट्रंप की इस रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं.

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर आपत्ति

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यह भूमिका अमेरिका के लिए शर्मिंदगी भरी और खतरनाक साबित हो सकती है. रुबिन ने लिखा कि पाकिस्तान ने न सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम में मदद की थी, बल्कि वह दुनिया के सबसे ज्यादा अमेरिका विरोधी और यहूदी विरोधी देशों में शामिल है.

उन्होंने आश्चर्य जताया कि अमेरिका उसी देश को इनाम दे रहा है जिसने पिछले कई दशकों से उसकी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाया है. रुबिन के अनुसार पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे और यह फैसला भविष्य में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

रुबिन की कड़ी आलोचना

माइकल रुबिन ने अपने लेख में पाकिस्तान की कई पुरानी घटनाओं का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन के मारे जाने पर अमेरिकी कार्रवाई को ‘गहरी निराशा’ बताया था. रुबिन ने ट्रंप की नीति की तुलना चाइल्ड मोलेस्टर को स्कूल में नौकरी देने से की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर भरोसा करके ट्रंप वही गलतियां दोहरा रहे हैं जो अफगानिस्तान, गाजा, सीरिया और यमन में हुईं. उनके अनुसार ऐसे समझौते जीत को हार में बदल देते हैं. रुबिन ने चेतावनी दी कि इससे पाकिस्तान और घमंडी हो जाएगा और उसे लगेगा कि अमेरिका ने उसे आतंक फैलाने की पूरी छूट दे दी है.

भारत बेहतर विकल्प

रुबिन ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान की बजाय भारत इस मध्यस्थता की भूमिका के लिए कहीं अधिक उपयुक्त होता. उन्होंने भारत को सलाह दी कि उसे सैन्य रूप से तैयार रहना चाहिए और यह भी पूछना चाहिए कि पाकिस्तान ने विदेश मंत्रालय को कैसे मात दी. रुबिन के मुताबिक भारत की विश्वसनीयता और स्थिर नीतियां इसे बेहतर विकल्प बनाती हैं. उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है जबकि वास्तव में भारत इस काम के लिए ज्यादा सही साबित होता. एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिका को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए.

ट्रंप की धमकी और वार्ता

ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को पाकिस्तान पहुंचेंगे और ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत करेंगे. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रस्तावित समझौता नहीं मानता तो अमेरिका ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देगा. इस बीच ईरान ने दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया है. सीजफायर की समय सीमा 22 अप्रैल को खत्म हो रही है. रुबिन जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के जरिए यह प्रक्रिया आगे बढ़ाना अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर सकता है.