नई दिल्ली: कनाडा और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है. कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध जो कभी हमारी ताकत का जरिया थे, अब हमारी कमजोरी बन गए हैं. इन संबंधों को अब सुधारने की जरूरत है. उनकी सरकार कनाडाई अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दूसरे देशों से नया निवेश आकर्षित करने और व्यापार समझौते करने की पूरी कोशिश कर रही है.
कार्नी ने कहा, 'दुनिया अब ज्यादा खतरनाक और बंटी हुई जगह बन गई है. अमेरिका ने व्यापार को लेकर अपना रुख बदल लिया है और टैरिफ को उस स्तर तक बढ़ा दिया है जो 'ग्रेट डिप्रेशन' के बाद से कभी नहीं देखा गया था. अमेरिका के साथ हमारे करीबी संबंध अब हमारी कमजोरी बन गए हैं और हमें इसे ठीक करना होगा. अमेरिका बदल गया है और हमें इसका जवाब देना ही होगा.'
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर ऑटोमोटिव और स्टील इंडस्ट्री के मजदूरों पर बुरा पड़ा है. इसके अलावा अनिश्चितता के माहौल के कारण कंपनियां नया निवेश करने में हिचकिचा रही हैं.
कई कनाडाई नागरिक डोनाल्ड ट्रंप की एक खास टिप्पणी से भी बहुत ज्यादा नाराज हैं, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए. कार्नी ने भी ट्रंप के इस खास बयान की कड़ी आलोचना की थी.
कार्नी पहले बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड, दोनों के गवर्नर रह चुके हैं. जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए गए उनके भाषण की काफी तारीफ हुई थी. उस भाषण में उन्होंने बड़े देशों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक दबाव डालने की प्रथा की आलोचना की थी.
कार्नी की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब उनकी पार्टी ने हाल ही में हुए चुनावों में जीत हासिल करके संसद में बहुमत पा लिया है. विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी इस समय उन पर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता पक्का करने का दबाव डाल रही है. कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के बीच मौजूदा मुक्त व्यापार समझौते की समीक्षा जुलाई में होनी है.
कार्नी का कहना है कि यह सोचना कि अमेरिका फिर से सामान्य हो जाएगा, कोई व्यावहारिक रणनीति नहीं है. अतीत में जीना सही तरीका नहीं है. अमेरिका बदल गया है और हमें इस वास्तविकता का जवाब देना होगा. यह हमारी सुरक्षा, हमारी सीमाओं और हमारे भविष्य पर फिर से नियंत्रण पाने की बात है.