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'पाकिस्तान इस्तेमाल करके फेंक देने वाली वेश्या, उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता', पूर्व अमेरिकी अधिकारी का जोरदार हमला

अमेरिकी रक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने अपने एक लेख में लिखा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर 'बस एक और दलाल' हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'पाकिस्तान इस्तेमाल करके फेंक देने वाली वेश्या, उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता', पूर्व अमेरिकी अधिकारी का जोरदार हमला
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अमेरिकी रक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने पाकिस्तान और उसके सैन्य नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला है. द संडे गार्जियन में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने दावा किया कि इस्लामाबाद मानता है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेवकूफ बना रहा है जबकि हकीकत इससे उलट हो सकती है.

लेख में रुबिन ने लिखा, 'वाशिंगटन के नजरिए से पाकिस्तान वो औरत नहीं है जिससे शादी की जा सके, वल्कि वह इस्तेमाल कर के फेंक देने वाली वेश्या है.' उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर 'बस एक और दलाल' हैं. रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता और दावा किया कि इस देश ने ऐतिहासिक रूप से अपने रणनीतिक महत्व को वाशिंगटन के लिए ज्यादा आंका है.

उन्होंने लिखा की ये घटनाएं ट्रंप द्वारा हाल ही में पाकिस्तान से संपर्क करने और उनके देश और उसके नेतृत्व की प्रशंसा करने वाली उनकी टिप्पणियों को लेकर भारत में व्याप्त आक्रोश के बीच घटी हैं. रुबिन ने कहा कि ओसामा बिन लादेन को पनाह देने और तालिबान का समर्थन देने का इतिहास होने के बावजूद ट्रंप ने पाकिस्तान को गले लगाकर भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी बनाने के दशकों के प्रयास को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया है.

पूर्व पेंटागन अधिकारी ने मुनीर को सम्मानित करने के लिए ट्रंप की आलोचना की. मुनीर को आतंकवाद का समर्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके हाथों में भारत और अमेरिका दोनों का खून लगा हुआ है.

ट्रंप की हालिया राजनयिक पहल का जिक्र करते हुए रुबिन ने लिखा पाकिस्तान संभवत: यह मानता है कि वह भारत के खिलाफ सैन्य और रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए क्षेत्रीय भूमिका में अपनी भूमिका का लाभ उठा सकता है.

उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप की समझ पर भी निशाना साधा और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की 'हजार साल पुराने विवाद' के बारे में पहले की टिप्पणियां दर्शाती हैं कि वे इतिहास के विद्यार्थी नहीं हैं.

अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के इतिहास का हवाला देते हुए रुबिन ने तर्क दिया कि वाशिंगटन ने रणनीतिक रूप से आवश्यक होने पर ही इस्लामाबाद के साथ बार-बार संपर्क साधा है और अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के बाद खुद को उससे दूर कर लिया है. रुबिन ने तर्क दिया कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेनाओं की अनुपस्थिति के साथ वाशिंगटन के लिए पाकिस्तान का रणनीतिक महत्व एक बार फिर कम हो गया है.