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'ईंट का जवाब पत्थर से देना हमेशा जरूरी नहीं...', मक्का समझौता और सऊदी सुरक्षा पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब पर हमलों को लेकर संयमित रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि हर हमले का जवाब उसी अंदाज में देना जरूरी नहीं. मक्का समझौता खुद एक बड़ा डिटरेंट है.

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Edited By: Shanu Sharma
'ईंट का जवाब पत्थर से देना हमेशा जरूरी नहीं...', मक्का समझौता और सऊदी सुरक्षा पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान
Courtesy: X (@ww3mediaa)

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब पर संभावित हमलों को लेकर स्पष्ट और संयमित रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि हर हमले का जवाब उसी अंदाज में देना जरूरी नहीं होता. उनके अनुसार मक्का समझौता खुद एक मजबूत रोक या डिटरेंट का काम कर सकता है. यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब यमन में जारी तनाव पूरे क्षेत्र में चिंता का विषय बना हुआ है.

ख्वाजा आसिफ ने मक्का समझौते को लेकर किसी भी तरह की उलझन या संदेह को खारिज किया. उन्होंने बताया कि अगर तीन देशों में से किसी एक पर हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. यह एक साझा रक्षा समझौता है जिसमें हर देश की जिम्मेदारी समान है.

अपने आप लागू हो जाएगा समझौता

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि समझौते की शर्तें पहले से ही पूरी तरह स्पष्ट हैं इसलिए किसी अतिरिक्त सफाई की जरूरत नहीं है. अगर सऊदी अरब पर बेवजह हमला होता है या यमन का मामला सऊदी अरब तक फैलता है तो यह समझौता अपने आप लागू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समझौते से पूरी तरह बंधा हुआ है और जरूरत पड़ने पर अपनी जिम्मेदारी जरूर निभाएगा.

उन्होंने एक कहावत का सहारा लेते हुए बताया कि ईंट का जवाब पत्थर से देना हमेशा जरूरी नहीं होता. यानी हर आक्रामक कदम के जवाब में उसी तरह की जवाबी कार्रवाई आवश्यक नहीं है. यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसमें बिना वजह तनाव बढ़ाने से बचा जाता है लेकिन जरूरत पड़ने पर पूरी तैयारी भी रखी जाती है. उनका यह रुख दर्शाता है कि पाकिस्तान फिलहाल संयम बरतने के पक्ष में है.

क्षेत्रीय तनाव के बीच प्रतिबद्धता

यमन में जारी स्थिति को लेकर क्षेत्र में चिंता बनी हुई है. ख्वाजा आसिफ के बयान से साफ संकेत मिलता है कि पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगा. साथ ही वह अनावश्यक संघर्ष से बचते हुए कूटनीतिक और रणनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है. पाकिस्तान का यह रुख मित्र देशों के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ शांति बनाए रखने की मंशा को भी रेखांकित करता है. मक्का समझौते की स्पष्टता और पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोनों ही क्षेत्र में स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत हैं.