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India Daily

'हमारी संस्कृति है बेस्ट', विदेश में 90 साल के अंकल को नहीं मिली बस में सीट तो इंडियन ने बनाया वीडियो

विदेश यात्रा के दौरान रश्मि चड्ढा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को बस में सीट नहीं मिलने का वीडियो शेयर किया. उन्होंने भारत में बुजुर्गों को मिलने वाले सम्मान और मदद की संस्कृति की तारीफ की.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'हमारी संस्कृति है बेस्ट', विदेश में 90 साल के अंकल को नहीं मिली बस में सीट तो इंडियन ने बनाया वीडियो
Courtesy: rashmichadha Instagram Account

नई दिल्ली: भारत में बड़ों का सम्मान और जरूरत के समय उनकी मदद करना सामाजिक संस्कार का हिस्सा माना जाता है. बस, ट्रेन या सार्वजनिक जगहों पर बुजुर्गों को सीट देना और उनके लिए जगह बनाना आम व्यवहार के तौर पर देखा जाता है. विदेश यात्रा के दौरान एक भारतीय यात्री ने इसी अंतर को महसूस किया और सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर भारतीय संस्कृति की तारीफ की.

वीडियो में रश्मि चड्ढा बताती हैं कि उन्हें भारत की एक बात बहुत अच्छी लगती है, जबकि कुछ देशों में उन्होंने इसका अलग अनुभव देखा. उन्होंने कहा कि अगर किसी बस में कोई बुजुर्ग व्यक्ति चढ़ता है और उसे बैठने की जगह नहीं मिलती तो भारत में अक्सर लोग अपनी सीट छोड़ देते हैं. खासकर बच्चे और युवा बुजुर्गों के सम्मान में खड़े होकर उन्हें बैठने की जगह देते हैं.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

रश्मि ने क्या बताया?

रश्मि ने विदेश यात्रा के दौरान करीब 90 साल के एक बुजुर्ग व्यक्ति का उदाहरण देते हुए बताया कि वह बस में आए और खड़े रह गए. आसपास बैठे लोगों में से किसी ने अपनी सीट छोड़ने की पहल नहीं की. आखिरकार रश्मि और उनके साथ मौजूद लोगों ने अपनी सीट छोड़कर बुजुर्ग को बैठाया. उन्होंने कहा कि वहां उनसे छोटे लोग भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने सीट देने के लिए आगे आने की कोशिश नहीं की.

भारतीय संस्कृति की तारीफ करते हुए क्या कहा?

रश्मि ने वीडियो में भारतीय संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें अपने देश में यह बात अच्छी लगती है कि लोग उम्र में बड़े व्यक्ति को सम्मान देते हैं और जरूरत पड़ने पर बैठने की जगह देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अगर रास्ते में कोई परेशान व्यक्ति दिखाई दे, कोई महिला गर्भवती हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो तो लोग कई बार मदद के लिए आगे आते हैं.

इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा शुरू हो गई. कुछ लोगों ने रश्मि की बात का समर्थन किया, जबकि कुछ यूजर्स ने अलग नजरिया सामने रखा. एक यूजर ने कहा कि पश्चिमी देशों में कई बुजुर्ग खुद किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा सीट देने को पसंद नहीं करते. यूजर ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि उन्होंने एक बुजुर्ग को सीट देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने सीट लेने से मना कर दिया और इस व्यवहार से खुश भी नहीं हुए.

लोगों ने क्या दी प्रतिक्रिया?

वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि सभी भारतीय भी ऐसा व्यवहार नहीं करते. उसके मुताबिक, यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में हर व्यक्ति बुजुर्गों या जरूरतमंदों को अपनी सीट जरूर देता है. दरअसल, अलग-अलग देशों में सार्वजनिक स्थानों पर सामाजिक व्यवहार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अलग संस्कृतियां देखने को मिलती हैं.

भारत में उम्र के आधार पर सम्मान और मदद की परंपरा मजबूत रही है, जबकि कई पश्चिमी समाजों में लोगों को अधिक स्वतंत्र और समान व्यवहार देने पर जोर दिया जाता है. ऐसे में सीट देना या न देना हमेशा सम्मान की कमी का संकेत नहीं होता, बल्कि स्थानीय सामाजिक मान्यताओं और व्यक्ति की अपनी पसंद पर भी निर्भर कर सकता है.