पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान इस्लामाबाद में ‘यादगार-ए-फतह’ यानी विजय स्मारक का उद्घाटन किया गया. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समारोह में हिस्सा लिया. पाकिस्तान ने इसे मई 2025 के भारत-पाक सैन्य टकराव में अपनी कथित जीत और सैनिकों के सम्मान से जोड़ा. भारत इस सैन्य कार्रवाई को ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जानता है.
समारोह में पाकिस्तान के राजनीतिक, सैन्य और न्यायिक नेतृत्व की प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं. सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर, वायुसेना प्रमुख जाहिर अहमद बाबर सिद्धू और नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ भी मौजूद रहे. संसद और सरकार के वरिष्ठ सदस्यों तथा राजनयिकों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्मारक को पाकिस्तान के संकल्प और दृढ़ता का प्रतीक बताया. उन्होंने मई 2025 के सैन्य संघर्ष को ‘मार्का-ए-हक’ यानी सत्य की लड़ाई के रूप में पेश किया और सैन्य नेतृत्व की तारीफ की. समारोह के दौरान स्मारक पर पाकिस्तान के इतिहास और सैन्य घटनाक्रम से जुड़े दृश्यों का लाइट एंड साउंड शो भी प्रदर्शित किया गया.
आधी रात को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने ‘यादगार-ए-फतह’ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस दौरान राष्ट्रगान बजाया गया. सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को स्मारक से जुड़े विशेष स्मृति चिह्न भी भेंट किए. समारोह का उद्देश्य पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस और सैन्य उपलब्धि के तौर पर पेश किए गए घटनाक्रम को एक साथ जोड़ना था.
जहां राजधानी में सरकारी स्तर पर भव्य आयोजन चल रहा था, वहीं इस्लामाबाद की सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम की शिकायतें सामने आईं. सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि सुरक्षा व्यवस्था और सड़क बंद होने के कारण हजारों लोग परेशान हुए. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आम नागरिकों के लिए राजधानी में आवाजाही इतनी मुश्किल क्यों हो गई.
समारोह को लेकर पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ यूजर्स ने सेना की बढ़ती भूमिका और राजनीतिक नेतृत्व के रुख पर सवाल उठाए. कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि कार्यक्रम में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की प्रमुख मौजूदगी क्यों रही, जबकि अन्य प्रांतों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति को लेकर चर्चा हुई.
समारोह में राष्ट्रपति जरदारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कथित बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आसिम मुनीर को अपना पसंदीदा ‘फील्ड मार्शल’ बताया था. जरदारी ने कहा कि मुनीर किसी दूसरे देश के नहीं, बल्कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल हैं. इस दौरान मंच पर मौजूद नेताओं की प्रतिक्रिया और तालियों ने भी सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरी.
यह स्मारक मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव की याद से जुड़ा है. भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक सैन्य तनाव रहा. पाकिस्तान ने उस संघर्ष को अपने पक्ष की सफलता के तौर पर पेश किया है.
‘यादगार-ए-फतह’ के उद्घाटन ने पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका को लेकर बहस को भी हवा दी है. समारोह में राजनीतिक नेतृत्व और सेना के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी ने इस संदेश को मजबूत किया कि मई 2025 की सैन्य कार्रवाई को पाकिस्तान राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में स्थापित करना चाहता है. हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक और सैन्य शक्ति प्रदर्शन बताते हुए आलोचना भी की.