menu-icon
India Daily

7 अक्टूबर का दिन होगा अहम, फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ रेपो रेट बढ़ा सकता है RBI

आम आदमी और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से 7 अक्टूबर का दिन बड़ा ही अहम रहने वाला है. महंगाई को देखते हुए आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
7 अक्टूबर का दिन होगा अहम, फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ रेपो रेट बढ़ा सकता है RBI
Courtesy: X

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की बैठक पर बाजार की नजरें टिकी हैं. 7 अक्टूबर को RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो फरवरी 2023 के बाद यह पहली दर वृद्धि होगी. इससे पहले लगातार 21 MPC बैठकों में रेपो रेट नहीं बढ़ाया गया.

बाजार में पहले से बन चुकी है उम्मीद

एक बिजनेस वेबसाइट Moneycontrol के 19 बाजार विशेषज्ञों के सर्वे में 15 ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जबकि चार विशेषज्ञों ने मौजूदा दर बनाए रखने की संभावना जताई है. इसलिए बाजार में दर बढ़ने की उम्मीद काफी हद तक पहले ही शामिल हो चुकी है. अब असली नजर RBI के अगले कदमों और उसके संकेतों पर होगी.

सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट नहीं, आगे की रणनीति अहम

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी से ज्यादा महत्वपूर्ण RBI का आगे का रुख होगा. बाजार यह जानना चाहेगा कि केंद्रीय बैंक आगे कितनी और कितनी तेजी से दरें बढ़ा सकता है.

IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक यह नीति बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संभावित दर वृद्धि चक्र की शुरुआत का संकेत दे सकती है. उनके अनुमान के अनुसार फरवरी तक कुल करीब 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है.

महंगाई के अनुमान पर भी नजर

RBI ने पिछली समीक्षा में वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान घटाकर 5 प्रतिशत किया था. हालांकि अब कुछ अर्थशास्त्रियों को इसमें बढ़ोतरी की संभावना नजर आ रही है. अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी.

महंगाई के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की बढ़ती कीमतें हैं. अभी तक दबाव का बड़ा हिस्सा आपूर्ति से जुड़ा माना जा रहा है, लेकिन चिंता यह है कि महंगी वस्तुओं का असर आगे चलकर व्यापक महंगाई में न बदल जाए.

मजबूत विकास दर RBI को दे सकती है गुंजाइश

भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. इसके बावजूद आगे की तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है. महंगा कच्चा तेल, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये पर दबाव दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं.

Moneycontrol के सर्वे में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत पर बनाए रखने की उम्मीद जताई है. कुछ विशेषज्ञों ने मजबूत पहली तिमाही के बाद अपने अनुमान में सुधार भी किया है.

बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी भी चुनौती

RBI के लिए सिर्फ ब्याज दर ही मुद्दा नहीं है. बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण हो गया है. सितंबर की शुरुआत में सिस्टम में अतिरिक्त तरलता करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी.

इसके बाद RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी OMO बिक्री और वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो यानी VRRR जैसी व्यवस्थाओं के जरिए अतिरिक्त नकदी को सोखने की कोशिश की. इसके बाद यह अतिरिक्त तरलता घटकर करीब 4-6 लाख करोड़ रुपये के दायरे में आ गई.

RBI के 6 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग सिस्टम में तरलता अधिशेष करीब 5.03 लाख करोड़ रुपये था. बाजार यह देखेगा कि केंद्रीय बैंक आगे नकदी प्रबंधन के लिए ब्याज दर के साथ किन अन्य उपायों का इस्तेमाल करता है.

रुपये और कच्चे तेल का दबाव बढ़ा

RBI के सामने बाहरी मोर्चे पर भी कई चुनौतियां हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत इस सप्ताह करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. अमेरिका में 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 5.2 प्रतिशत तक पहुंची है.

इसी दौरान भारतीय रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया, जबकि भारत की 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.2 प्रतिशत से ऊपर चली गई. महंगा तेल और ऊंची वैश्विक ब्याज दरें रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं.

अब RBI के संकेतों पर टिकी बाजार की नजर

मौजूदा परिस्थितियों में RBI के सामने महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है. मजबूत घरेलू वृद्धि केंद्रीय बैंक को महंगाई पर ज्यादा ध्यान देने की कुछ गुंजाइश देती है, लेकिन महंगा तेल और कमजोर रुपया जोखिम बढ़ा रहे हैं.

ऐसे में बाजार को फिलहाल रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की सीमित बढ़ोतरी की उम्मीद है. हालांकि असली संदेश RBI के रुख, महंगाई और विकास के अनुमानों तथा आने वाले महीनों में दरों की दिशा से मिलेगा.