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India Daily

2 महीने में दूसरी बार अमेरिका जाएंगे पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर, क्या होगा एजेंडा

Asim Munir US Trip: पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इस महीने फिर से अमेरिका जाएँगे. दो महीनों में यह उनकी दूसरी वाशिंगटन यात्रा होगी, जो द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाढ़ता का संकेत है.

Shilpa Shrivastava
2 महीने में दूसरी बार अमेरिका जाएंगे पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर, क्या होगा एजेंडा

Asim Munir US Trip: पाकिस्तानी सेना चीफ असीम मुनीर इस महीने फिर से अमेरिका जाएंगे. दो महीनों में यह उनकी दूसरी वाशिंगटन यात्रा होगी, जो द्विपक्षीय संबंधों की तरफ संकेत देती है. बता दें कि असीम मुनीर संयुक्त राज्य अमेरिका के सेंट्रल कमांड कमांडर (CENTCOM) जनरल माइकल कुरिल्ला के विदाई समारोह में शामिल होंगे. इन्होंने पाकिस्तान को एंटी-टेररिज्म अभियानों में अहम सहयोगी बताया था.

मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की एक्टिविटी की निगरानी करने वाले फोर स्टार जनरल कुरिल्ला इस महीने के अंत में रिटायर होने वाले हैं. कुछ समय पहले उन्होंने पाकिस्तान की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने अमेरिका से मिली खुफिया जानकारी की मदद से 5 ISIS-K आतंकियों को पकड़ा था.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान ने जबरदस्त सहयोग किया- जनरल कुरिल्ला

अमेरिकी संसद की रक्षा कमेटी के सामने जनरल कुरिल्ला ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान ने बहुत सहयोग किया है. इसलिए हमें भारत और पाकिस्तान दोनों से अच्छे रिश्ते बनाने की जरूरत है. हालांकि, इसके बाद सवाल यह उठता है कि जब भारत लगातार दुनिया को ये समझाने की कोशिश कर रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, ऐसे में पाकिस्तान की तारीफ करना भारत को अच्छा नहीं लगा।

भारत ने माना पुराने समय की वापसी:

भारत ने इसे पुराने समय की वापसी माना जब भारत और पाकिस्तान को एक ही नजर से देखा जाता था. इस तारीफ के जवाब में, पाकिस्तान ने जनरल कुरिल्ला को अपना एक बड़ा नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज देकर सम्मानित किया. ये सम्मान उन्हें जुलाई में इस्लामाबाद दौरे के दौरान दिया गया. देखा जाए तो यह सभी घटनाएं दिखाती हैं कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सैन्य और रणनीतिक साझेदारी फिर से मजबूत हो रही है. जून में, पाकिस्तान के जनरल मुनीर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लंच पर मुलाकात की थी. ये मुलाकात पहलगाम आतंकी हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के कुछ ही हफ्तों बाद हुई थी.