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'हमें किसी की जरूरत नहीं...', मदद ना मिलने पर 'बौखला' उठे ट्रंप; NATO गठबंधनों को भी दे दी चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज पर जीत के लिए अपने सहयोगी देशों से मदद मांगी थी. हालांकि मदद ना मिलने पर गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी देश की सेना इस जंग के लिए काफी है.

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Edited By: Shanu Sharma
'हमें किसी की जरूरत नहीं...', मदद ना मिलने पर 'बौखला' उठे ट्रंप; NATO गठबंधनों को भी दे दी चेतावनी
Courtesy: X (@MikeSington)

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है. उम्मीद के विपरीत ईरान द्वारा भी लगातार हमले किए जा रहे हैं. ईरान ने मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थिर किया है. जिसके कारण पुरी दुनिया में ईधन की कमी हो गई है. हालांकि इसके बाद भी ट्रंप हमले कर रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज पर जीत के लिए अपने सहयोगी देशों से मदद मांगी. उन्होंने जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन समेत कई अन्य देशों से युद्धपोत भेजने का आग्रह किया. हालांकि किसी भी देश ने उनकी इस आग्रह को स्वीकार नहीं किया.  

NATO गठबंधन सदस्यों को दी चेतावनी

ट्रंप के इस आग्रह पर कुछ देशों सीधा ना का जवाब दे दिया. वहीं कुछ देशों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. जिससे डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दो टूक जवाब दिया. उन्होंने सभी सहयोगी देशों के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि हमें किसी की कोई जरूरत नहीं है. हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं. हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है.' हालांकि उन्होंने इस बात की आलोचना की है कि NATO गठबंधन के सदस्य होने के बाद भी अमेरिका की मदद नहीं की जा रही है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि निगेटिव प्रतिक्रिया नाटो के लिए फ्यूचर में बहुत बुरा साबित हो सकता है.

सात देशों से मांगी मदद, सबने कहा 'NO'

ईरान ने साफ ऐलान किया है कि इस रास्ते से कोई भी अमेरिका और इजरायल का नांव नहीं पार होगा. साथ ही यह भी कहा कि इसके मदद में उतरने वाले देशों को भी नहीं बचाया जाएगा. लेकिन इस परेशानी से निकलने के लिए ट्रंप ने सात देशों से मदद मांगी. जिसमें से जर्मनी, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके पास होर्मुज में युद्धपोत भेजने के लिए तत्काल में कोई योजना नहीं है.

जर्मन चालंसर ने साफ कहा कि इस युद्ध को शुरू करने से पहले हमसे कोई भी बात नहीं की गई. ट्रंप ने इस जंग के लिए संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ या नाटो से स्वीकृति नहीं ली है. हालांकि ट्रंप ने इसपर साफ जवाब दिया कि वे उन्हें जबरदस्ती इस जंग में शामिल करना जरूरी नहीं समझतें, क्योंकि उन्हें किसी की जरूरत नहीं है. इस रास्ते के बंद होने से क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है. हालांकि ट्रंप अभी भी इस जंग को खत्म करने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं.