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नेपाल में अज्ञात शवों को क्यों दफनाया जा रहा? बाद में कैसे होगी मृतकों की पहचान

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद शवगृह और अस्थायी केंद्र भर गए हैं. पहचान नहीं हो सके शवों को DNA, फोटो और अन्य प्रमाण सुरक्षित करने के बाद दफनाया जा रहा है.

KanhaiyaaZee
नेपाल में अज्ञात शवों को क्यों दफनाया जा रहा? बाद में कैसे होगी मृतकों की पहचान
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हुई भारी तबाही के बीच अब प्रशासन के सामने मृतकों की पहचान और शवों के सुरक्षित प्रबंधन की चुनौती खड़ी हो गई है. बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद अस्पतालों और अस्थायी शव रखने वाले केंद्रों में जगह कम पड़ गई. कई शव खराब होने लगे, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी बढ़ रहा है. ऐसे में अधिकारी पहचान नहीं हो सके शवों को दफना रहे हैं, लेकिन उससे पहले DNA और दूसरे जरूरी प्रमाण सुरक्षित किए जा रहे हैं.

नेपाल में बरामद 768 शवों में शनिवार शाम तक केवल 20 की पहचान परिजनों ने की थी. चितवन में सबसे ज्यादा 259 शव मिले हैं, लेकिन इनमें केवल चार की पहचान हो सकी. नवलपरासी पूर्व में 184, नवलपरासी पश्चिम में 82, गोरखा में 58 और नुवाकोट में 52 शव मिले हैं. धादिंग में 50, तनहूं में 36 और रसुवा में 13 शव बरामद किए गए हैं.

सड़ते शवों ने बढ़ाई चिंता

शवों के लंबे समय तक रखे रहने से स्थिति और मुश्किल हो गई है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि शवों के सड़ने और दुर्गंध बढ़ने से संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है. चितवन के अस्पतालों में उपलब्ध शवगृह इतनी बड़ी संख्या में शव रखने में सक्षम नहीं हैं. इसके बाद जिला सुरक्षा समिति ने भरतपुर महानगरपालिका के देवघाट में उन शवों को दफनाने का फैसला किया, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है.

पहचान के लिए सुरक्षित रहेगा रिकॉर्ड

दफनाने से पहले फोरेंसिक टीमें हर शव का DNA नमूना लेंगी और उसे एक स्थायी पहचान या संदर्भ संख्या दी जाएगी. शव की तस्वीर, शारीरिक विवरण, कपड़े, गहने, पहचान पत्र और दूसरी वस्तुओं का रिकॉर्ड भी इसी नंबर से जोड़ा जाएगा. पोस्टमार्टम, जांच, DNA प्रोफाइल, दफनाने की तारीख और कब्र की जगह की जानकारी भी सुरक्षित रखी जाएगी. बाद में इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर लापता लोगों के परिजनों से मिलान किया जा सकेगा.

पुलिस ने शुरू किया ऑनलाइन रिकॉर्ड

नेपाल पुलिस ने अज्ञात और लावारिस शवों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करानी शुरू की है. रसुवा जिले में मिले शवों की जानकारी देखने के लिए लोगों को QR कोड स्कैन करने या पुलिस के आधिकारिक डेटाबेस पर जाने की सुविधा दी गई है. पहचान के अभियान में 40 सदस्यीय मेडिकल टीम काम कर रही है. इसमें सात फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट और सात डेंटल सर्जन शामिल हैं. अस्थायी केंद्रों में रखे शवों से DNA नमूने भी लिए जा चुके हैं.

कई जिलों में फैल रही समस्या

शवों को संभालने की समस्या केवल चितवन तक सीमित नहीं है. नवलपरासी पूर्व से कुछ शवों को पोखरा और पाल्पा भेजा गया है, जबकि दूसरे शव रुपंदेही और कपिलवस्तु के अस्पतालों में पहुंचाए गए हैं. काठमांडू में भी संभावित दफन स्थलों की तलाश शुरू कर दी गई है. इस आपदा में करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. अधिकारियों के सामने चुनौती है कि शवों का सुरक्षित प्रबंधन भी हो और परिवारों के पास पहचान का मौका भी बना रहे.