नई दिल्ली: नेपाल में भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चल रहा है. बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क टूट गया है. ऐसे समय में भारत और चीन नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री के साथ बेली ब्रिज भी भेज रहे हैं. लेकिन सवाल है कि बेली ब्रिज आखिर होते क्या हैं और आपदा के समय इनकी जरूरत क्यों पड़ती है.
बेली ब्रिज पहले से तैयार स्टील के हिस्सों से बनाया जाने वाला एक अस्थायी या मॉड्यूलर पुल होता है. इसके अलग अलग हिस्से फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं और जरूरत वाली जगह पर ले जाकर उन्हें जोड़ा जाता है. इनमें स्टील पैनल, बीम, कनेक्टर और डेक जैसे हिस्से शामिल होते हैं.
इन हिस्सों को पिन और बोल्ट की मदद से आपस में जोड़ा जाता है. जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पैनल लगाकर पुल की लंबाई और मजबूती बढ़ाई जा सकती है. यही वजह है कि इन्हें अलग अलग परिस्थितियों और जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सकता है.
बाढ़ या भूस्खलन में जब कोई पुल बह जाता है तो लोगों और राहत सामग्री की आवाजाही रुक जाती है. ऐसे में नया स्थायी पुल बनाने में कई महीने लग सकते हैं. बेली ब्रिज इस समस्या का तेज समाधान देता है.
नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था दोबारा शुरू करने के लिए भारत और चीन से बेली पुलों के निर्माण में सहायता मांगी है. अचानक आई बाढ़ में तीन दर्जन से अधिक पुल बह जाने के बाद यह जरूरत पैदा हुई. भारत की ओर से सात बेली ब्रिज के साथ 230 फीट लंबे सिंगल लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी भेजे गए हैं. इन उपकरणों को लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंचने के लिए भेजे जा चुके हैं.
भारत के साथ चीन ने भी नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध कराकर मदद की है. दोनों देशों की ओर से भेजे जा रहे इन पुलों का उद्देश्य बाढ़ से टूटे संपर्क को जल्द से जल्द बहाल करना है.