नई दिल्ली: बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम के सामने आने के बाद अब केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि मोदी सरकार प्रदर्शन, सामाजिक समीकरण और आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर टीम में बदलाव कर सकती है. चर्चा केवल नए चेहरों की एंट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने और कई मौजूदा चेहरों की विदाई की भी अटकलें हैं.
'रिपोर्टर्स ऑफ एयर' की चर्चा में बताया गया कि इस बार मंत्रियों के कामकाज को बदलाव का अहम आधार बनाया जा सकता है. बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनावों के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है. ऐसे में सरकार चाहती है कि मंत्री केवल दिल्ली तक सीमित न रहें, बल्कि जनता के बीच जाकर कामकाज का असर दिखाएं. इसी वजह से कई मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा किए जाने की चर्चा है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के नाम को लेकर भी चर्चा सामने आई है. फिलहाल उनके पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अहम विभाग हैं. संभावना जताई जा रही है कि उनसे कुछ जिम्मेदारियां लेकर उन्हें बड़े दायित्व की ओर बढ़ाया जा सकता है. चर्चा में उन्हें सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में जगह मिलने की संभावना से भी जोड़ा गया है.
नितिन गडकरी को लेकर भी अलग तरह की अटकलें हैं. चर्चा यह नहीं है कि उन्हें पूरी तरह सरकार से बाहर किया जाएगा, बल्कि उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना जताई जा रही है. उनके हालिया बयानों और ई-20 पेट्रोल से जुड़े विवाद का भी राजनीतिक संदर्भ में उल्लेख हुआ. हालांकि, गडकरी ने अपने पद से हटने की बात नहीं कही है. इसलिए फिलहाल इसे केवल संभावित विभागीय फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी के पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है. यह मंत्रालय युवाओं और छात्रों से सीधे जुड़ा है, इसलिए इसमें स्थायी बदलाव की संभावना पर चर्चा है. इसके अलावा कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं. ऐसे में कुछ जिम्मेदारियां बांटकर नए चेहरों को जगह देने की तैयारी हो सकती है. मौजूदा व्यवस्था में केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं.
चर्चा के मुताबिक सितंबर या अक्टूबर में मंत्रिमंडल विस्तार संभव है और 15 से 17 नए चेहरों को मौका मिल सकता है. इनमें युवा, महिलाएं और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा जैसे चुनावी राज्यों को भी ध्यान में रखे जाने की संभावना है. 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी के सामने मंत्रिमंडल के जरिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की बड़ी चुनौती होगी.