Nepal Flash Flood: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद अब सरकार ने अपने फैसले में बड़ा बदलाव किया है. सैकड़ों लोगों की मौत के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है. पहले नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को देश में आने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद उसने कुछ विदेशी विशेषज्ञों और बचाव दलों को आने की इजाजत दे दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल सरकार पर उन देशों की ओर से दबाव बनाया गया, जिनके नागरिक बाढ़ के बाद से लापता हैं. इसके बाद नेपाल ने सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों को सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होने की अनुमति दी है.
नेपाल ने पहले कहा था कि उसकी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य संभालने में सक्षम हैं. सरकार का कहना था कि अगर किसी विशेष तकनीकी मदद की जरूरत होगी, तो वह खुद दूसरे देशों से सहायता मांगेगी.
अब नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों और टीमों को बचाव कार्य में मदद करने की अनुमति दी है. इन टीमों का इस्तेमाल लापता लोगों की तलाश और कुछ मामलों में फॉरेंसिक जांच के लिए किया जा सकता है. भारत ने नेपाल की मदद के लिए पहले ही बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भेजी है. इसके अलावा भारत ने नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमों को भी नेपाल भेजने की पेशकश की है.
नेपाल की बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 320 भारतीय अभी भी लापता हैं. वहीं, करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए थे. इनमें से 153 भारतीय सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं. भारत सरकार लगातार नेपाल के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद देने की बात कही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने नेपाल को NDRF की प्रशिक्षित टीम और जरूरी उपकरण भेजने की पेशकश की है. इन टीमों की मदद से लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान को तेजी मिल सकती है.