नई दिल्ली: नेपाल चुनाव के नतीजों से पहले हर किसी की धड़कनें तेज हैं. चल रही वोटों की गिनती से साफ पता चलता है कि एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने वाला है. 5 मार्च के चुनावों में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन्द्र यानी बालेन शाह की पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बढ़त के साथ आगे चल रही है, जबकि पारंपरिक पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार देर रात तक 275 सदस्यों वाली संसद की 165 सीधे मुकाबले वाली सीटों में से RSP 117 पर आगे थी. इससे बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है. RSP जहां भारी बहुमत की ओर बढ़ रही है, वहीं नेपाल की पारंपरिक पार्टियां, जैसे नेपाली कांग्रेस और CPN-UML लोगों द्वारा पूरी तरह से किनारे कर दी गई हैं.
RSP 117 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि दूसरे नंबर पर मौजूद नेपाली कांग्रेस सिर्फ 15 सीटें जीतने के लिए संघर्ष कर रही है और के.पी. ओली की लीडरशिप वाली UML सिर्फ 13 सीटें जीतने के लिए संघर्ष कर रही है. पुष्प कमल दहल प्रचंड की लीडरशिप वाली पार्टी की हालत और भी खराब है. बड़े नेताओं में से सिर्फ प्रचंड ही अपनी सीट बचा पाए और उनकी पार्टी डबल डिजिट तक भी नहीं पहुंच पाई.
बालेन शाह को Gen-Z का सपोर्ट ओली को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं और Gen-Z वोटरों का जबरदस्त सपोर्ट बालेन शाह की जीत का सबसे बड़ा कारण था, जिससे दशकों से सत्ता में काबिज पारंपरिक पार्टियों की पकड़ कमजोर हुई.
पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. ओली अपने चुनाव क्षेत्र में बुरी तरह हार गए हैं. आज बालेन शाह उन्हें झापा जिले के उसी चुनाव क्षेत्र से हराने वाले हैं, जहां से उन्होंने एक को छोड़कर लगातार सात चुनाव जीते थे.
देर रात तक चली गिनती में बालेन को करीब 17,000 वोट मिले थे, जबकि ओली को सिर्फ 4,000 वोट मिले. इसका मतलब है कि ओली अभी बालेन से 13,000 वोटों से पीछे हैं.
सिर्फ ओली ही नहीं, उनकी पार्टी का कोई भी अधिकारी या उनकी सरकार का कोई भी मंत्री वोटों की गिनती में आगे नहीं चल रहा है. पार्टी के सभी बड़े नेता हार की कगार पर हैं.
इस बीच नेपाली कांग्रेस भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रही है. पार्टी अध्यक्ष गगन थापा भी अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से पीछे चल रहे हैं, जबकि पार्टी के कई बड़े नेता चुनाव हार गए हैं.
इसका मतलब है कि नेपाल के इतिहास में 36 साल में पहली बार, कोई एक पार्टी न सिर्फ पूरी बहुमत बल्कि भारी बहुमत से जीतेगी. लोगों को राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद है और उन्हें इस सरकार से बहुत उम्मीदें हैं.