Nobel Peace Prize 2026:भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम नवी' पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. नॉर्वे की नोबेल समिति ने उन्हें मानवाधिकारों की रक्षा, शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के प्रयासों के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार हासिल करने से चूक गए हैं.
88 वर्षीय नवी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक भारतीय तमिल परिवार में हुआ था. उनका परिवार मूल रूप से दक्षिण भारत से जुड़ा है. उनके दादा तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका जाकर बस गए थे. रंगभेद के दौर में पली-बढ़ीं नवी पिल्लई ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद कानून की पढ़ाई पूरी की और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने का काम शुरू किया.
BREAKING NEWS The Norwegian Nobel Committee has decided to award the 2026 #NobelPeacePrize to Navanethem “Navi” Pillay for her efforts to promote peace and international law. #NobelPrize https://t.co/97vurspw6z
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 9, 2026
नवी पिल्लई दक्षिण अफ्रीका के नेटाल प्रांत में लॉ प्रैक्टिस शुरू करने वाली पहली गैर-श्वेत महिला बनी थीं. रंगभेद के दौर में उन्होंने राजनीतिक बंदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मामलों की पैरवी की. उन्होंने जेलों में होने वाली कथित प्रताड़ना और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ भी आवाज उठाई.
नवी पिल्लई का अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में भी लंबा योगदान रहा है. उन्होंने रवांडा के लिए बनाए गए इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में न्यायाधीश के रूप में काम किया और बाद में इसकी अध्यक्ष भी बनीं. यहां उन्होंने युद्ध अपराधों और नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई की. उनके कार्यकाल के दौरान एक ऐतिहासिक फैसले में बलात्कार और यौन हिंसा को नरसंहार के हिस्से के तौर पर मान्यता दी गई.
नवी पिल्लई ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC की न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा वह 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रही थीं. इस पद पर रहते हुए उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर काम किया और पीड़ितों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में भूमिका निभाई.
हाल के वर्षों में नवी पिल्लई ने इजरायल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच करने वाले संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता भी की. उनका काम महिलाओं के अधिकारों, पीड़ितों को न्याय दिलाने और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय करने पर केंद्रित रहा है.
नवी पिल्लई ने हार्वर्ड लॉ स्कूल से Doctor of Juridical Science की डिग्री हासिल की है. वह यह डिग्री हासिल करने वाली पहली दक्षिण अफ्रीकी नागरिक बताई जाती हैं. कानून और मानवाधिकार के क्षेत्र में उनके लंबे करियर ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है.
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बार भी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला. ट्रंप लंबे समय से खुद को शांति स्थापित करने वाला नेता बताते रहे हैं और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनके नाम की चर्चा भी होती रही है. हालांकि, 2026 में यह सम्मान नवी पिल्लई के नाम रहा.
नवी पिल्लई को मिला यह सम्मान मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान को वैश्विक मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है. उनके जीवन की कहानी रंगभेद के दौर में संघर्ष से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय न्याय के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचने की प्रेरणादायक यात्रा भी है.