अमेरिकी-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे इस जंग के कारण पूरे विश्व को नुकसान हो रहा है. पूरे विश्व में ऊर्जा सप्लाई चेन टूट गया है. दुनिया में स्थिति और भी ज्यादा खराब ना हो इसके लिए सभी देश इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करने की मांग कर रहे हैं. इसी बीच रविवार को पाकिस्तान में तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. जिसमें तीनों देशों ने इस युद्ध को रोकने के तरीकों पर चर्चा की.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बैठक की शुरुआती चर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए दोबारा खोलने पर केंद्रित रही. इस क्षेत्र के बंद होने से पूरा विश्व प्रभावित है, यह क्षेत्र दुनिया के तेल निर्यात का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में नजर आ रहा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बैठक के पहले दिन के बाद कहा कि क्षेत्रीय शक्तियों ने युद्ध को जल्द और स्थायी रूप से खत्म करने के रास्तों पर विस्तार से बात की. उन्होंने मेहमान मंत्रियों को इस्लामाबाद में संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता की जानकारी भी दी. डार ने बताया कि सभी पक्ष पाकिस्तान की भूमिका पर भरोसा जता रहे हैं, चीन ने इस पहल का पूरा समर्थन किया है. सूत्रों ने बताया कि बैठक में खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर कुछ प्रस्ताव तैयार किए गए. इन्हें अमेरिका को भेजा गया है, प्रस्तावों में स्वेज नहर जैसी शुल्क व्यवस्था भी शामिल है.
मिल रही जानकारी के मुताबिक तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब तेल परिवहन के लिए एक संयुक्त संघ बनाने का विचार कर रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया है. हालांकि पाकिस्तान ने कहा है कि वह औपचारिक रूप से इसमें शामिल नहीं होगा. तुर्की के एक राजनयिक सूत्र ने कहा कि अंकारा की सबसे बड़ी प्राथमिकता युद्धविराम है. सुरक्षित समुद्री रास्ता बनाने से सभी पक्षों के बीच विश्वास बढ़ सकता है.
इससे पहले इशाक डार ने तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डार ने लिखा कि ईरान ने पाकिस्तानी ध्वज वाले 20 और जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है. मिस्र के विदेश मंत्री अब्देलअती ने कहा कि इन वार्ताओं का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू करना है.