अमेरिका दुनिया के सबसे मजबूत देशों में गिना जाता है. टेक्नोलॉजी, हेल्थ, अर्थव्यवस्था, साइंस से लेकर अमूमन हर एक क्षेत्रों में अवल है. हालांकि अभी एक क्षेत्र है, जहां पर अमेरिकी थोड़ा पीछे है, वो क्षेत्र कुछ और नहीं बल्कि नैचुरल रिसोर्स, यानी पेट्रोल-डीजल का क्षेत्र है. इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अमेरिका पूरा कोशिश कर रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में वेनेजुएला पर कब्जा कर लिया और अब लगातार ईरान पर हमला कर रहा है. जिसके पीछे उनका मकसद साफ पता चलता है. ट्रंप इन दोनों देशों के पेट्रोलियम पर कब्जा चाहते हैं. उन्होंने खुद अब इस बात को स्वीकार कर लिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान का तेल लेना पसंद करेंगे. साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि वॉशिंगटन देश के मुख्य एक्सपोर्ट हब, खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकता है. इसके लिए उन्होंने हजारों अमेरिकी सैनिकों को मीडिल ईस्ट में में तैनात करना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सच कहूं तो, मेरी सबसे पसंदीदा चीज है ईरान का तेल लेना, लेकिन अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग कहते हैं. वे मुझसे यह पूछ रहे हैं कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? वे बेवकूफ लोग हैं. हालांकि ट्रंप के इस बयान से जंग और भी तेज हो सकता है.
ऊर्जा क्षेत्र में पहले से ही वैश्विक स्तर उथल-पुथल मची है. एशियाई ट्रेडिंग में ब्रेंट क्रूड सोमवार को 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया. यह बढ़ते पिछले एक महीने में सबसे ज्यादा है. हालांकि ट्रंप ने यह दावा किया कि हम और भी ज्यादा विचार कर रहे हैं. शायद हम खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा कर लें, शायद न करें. हमारे पास बहुत सारे विकल्प हैं.
ट्रंप ने कहा कि हमें इसके लिए सबसे पहले वहां पर कुछ समय के लिए रहना पड़ेगा. वहीं उन्होंने द्वीप की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई भी सुरक्षा व्यवस्था है. हम आसानी से वहां कब्जा कर सकते हैं. सामने आ रही जानकारी के मुताबिक ट्रंप ने पहले ही 10,000 सैनिकों की तैनाती का आदेश दे दिया है. जिसमें से लगभगा 3500 सैनिक, 2000 मरीन शुक्रवार को शामिल हो चुका है. वहीं 2200 मरीन रास्ते में बताए जा रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यहां हमला करने से बहुत बड़ा जोखिम हो सकता है. इस हमले के बाद शायद संघर्ष और भी ज्यादा बढ़ जाए. जिसके कारण ऊर्जा क्षेत्र प्रभावित हो सकता है.