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क्यों खास है ये पंख जिसे खरीदने के लिए लोगों ने लुटा दिए 24 लाख, एक सदी से नहीं दिखी थी झलक

Most expensive feather of World: मोर पंख की धार्मिक महिमा तो हम सब जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी और पक्षी के पंख की भी इतनी कीमत हो सकती है?

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huia bird single feather
Courtesy: Freepik AI generated

Most expensive feather of World: मोर पंख की धार्मिक महिमा के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि न्यूजीलैंड के एक लुप्त पक्षी हुइया का एक छोटा सा पंख 23 लाख 66 हजार रुपये में नीलाम हुआ है? जी हाँ, यह सच है! न्यूजीलैंड के हुआया पक्षी का एक छोटा सा पंख हाल ही में नीलामी में 23 लाख 66 हजार रुपये में बिका है.

दशकों पहले लुप्त हो चुका है ये पक्षी

यह पक्षी, जो दशकों पहले लुप्त हो चुका है, माओरी लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता था. इसकी खासियत थी इसके सुंदर पंख, जिनके किनारों पर सफेद टिप लगी होती थी. हुआया पंखों को अक्सर प्रमुखों और उनके परिवारों द्वारा हेडपीस के रूप में पहना जाता था, गिफ्ट के रूप में भी दिया जाता था, और इसकी वजह से इसका व्यापार भी खूब होता था.

यह नीलामी रिकॉर्ड तोड़ने वाली थी, क्योंकि शुरुआत में इस पंख की कीमत केवल 3000 डॉलर (लगभग 2.2 लाख रुपये) होने की उम्मीद थी. 28,417 अमेरिकी डॉलर (लगभग 23.66 लाख रुपये) में बिकने वाला यह पंख पिछले रिकॉर्ड से 450% अधिक कीमत पर बिका.

117 साल पहले दिखी थी आखिरी झलक

न्यूजीलैंड के संग्रहालय के अनुसार, हुआया पक्षी को आखिरी बार 1907 में देखा गया था. उसके बाद बीस से तीस वर्षों तक इसकी अपुष्ट रूप से sightings होती रहीं, लेकिन अब यह कहीं नजर नहीं आता.

नीलामी घर में डेकोरेशन ऑर्ट की प्रमुख लीह मॉरिस ने कहा कि यह पंख अद्भुत स्थिति में था, इसकी चमक अभी भी बनी हुई थी, और इसे कीड़ों से कोई नुकसान नहीं हुआ था. इसे यूवी सुरक्षात्मक ग्लास में फ्रेम करके रखा गया था, और इसे केवल म्यूजियम कर्मियों और लाइसेंस प्राप्त लोगों द्वारा ही देखा जा सकता था.

मॉरिस ने कहा कि उन्हें इस नीलामी के लिए रिकॉर्ड संख्या में आवेदन मिले थे, क्योंकि न्यूजीलैंड के लोग यह देखना चाहते थे कि यह पंख कैसा दिखता था जिसकी इतनी महिमा थी.

माओरी संस्कृति में हुआया पंख का महत्व: हुआया पंख माओरी लोगों के लिए केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं थे, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक स्थिति का भी प्रतीक थे. प्रमुखों और उनके परिवारों द्वारा पहने जाने वाले हेडपीस में लगे ये पंख उनके अधिकार और प्रतिष्ठा का प्रतीक थे.

विलुप्ति के खतरे: हुआया पंखों की अत्यधिक मांग और प्राकृतिक आवासों का विनाश इस प्रजाति के लुप्त होने का मुख्य कारण बना. 1900 के दशक की शुरुआत में, हुआया पक्षियों की संख्या में तेजी से गिरावट आई और 1920 तक यह पूरी तरह से विलुप्त हो गया.

संरक्षण प्रयास: हुआया पक्षी को वापस लाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है. वैज्ञानिक डीएनए क्लोनिंग तकनीक का उपयोग करके इस प्रजाति को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं.

हुआया पंख की नीलामी न केवल एक दुर्लभ वस्तु की बिक्री है, बल्कि यह विलुप्त होने के खतरे और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता का भी प्रतीक है.