नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. ईरान और इजरायल के बीच सीधे सैन्य हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका गहरा गई है. ताजा घटनाक्रम में दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं और कई स्थानों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी इजरायल में कई तेज धमाके सुनाई दिए हैं. बताया जा रहा है कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोकने के लिए इजरायली वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी गई है. इजरायली सेना ने नागरिकों को सुरक्षित क्षेत्रों के पास रहने और सायरन चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है. मोबाइल फोन पर भी आपात संदेश भेजे गए हैं, ताकि संभावित हमलों से पहले लोग सतर्क रह सके.
वहीं, इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान की राजधानी तेहरान पर मिसाइल हमले किए. रिपोर्ट के अनुसार, शहर के यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और जोम्हूरी इलाके में मिसाइलें गिरी, जबकि डाउनटाउन के पाश्चर स्ट्रीट क्षेत्र के आसपास से घना धुआं उठता देखा गया. हमलों के बाद शहर के कई हिस्सों में अफरातफरी का माहौल बन गया और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई.
तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने अमेरिका के विदेशी सैन्य ठिकानों पर भी हमले शुरू कर दिए. जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया. इस घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि संघर्ष अब केवल ईरान-इजरायल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर फैल सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार शक्ति बनने नहीं देगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया है, जिसका उद्देश्य ईरानी शासन से उत्पन्न खतरे को समाप्त करना है.
इजरायली हमलों के बाद ईरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. सूत्रों के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को तेहरान से हटाकर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. राजधानी में मोबाइल सेवाएं बाधित होने और सैन्य गतिविधि बढ़ने से स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
इजरायल के रक्षा मंत्री ने पुष्टि की है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई की गई है और देश में आपात स्थिति लागू कर दी गई है. सेना का कहना है कि ईरान से आगे भी मिसाइल हमलों की आशंका बनी हुई है और सैन्य अभियान कई दिनों तक जारी रह सकता है. नागरिकों को सुरक्षित क्षेत्रों में रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.
मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यह टकराव जल्द खत्म होने वाला नहीं है. दोनों देशों की सैन्य तैयारी और अमेरिकी दखल की संभावना से यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है.