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India Daily

ईरान का आसमान लॉक! इजरायल हमलों के बाद फ्लाइट्स के रूट में बदलाव, बंद हुए हवाई क्षेत्र

शनिवार सुबह ईरान के ऊपर से गुजरने वाली कई अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड़ानों का रास्ता अचानक बदलना पड़ा, क्योंकि तेहरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
ईरान का आसमान लॉक! इजरायल हमलों के बाद फ्लाइट्स के रूट में बदलाव, बंद हुए हवाई क्षेत्र
Courtesy: @mauman707 X account

नई दिल्ली: शनिवार सुबह ईरान के लिए तनावपूर्व रहा. एक बार फिर से यहां पर तनाव चरम पर पहुंच गया है. शनिवार सुबह ईरान के ऊपर से गुजरने वाली कई अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड़ानों का रास्ता अचानक बदलना पड़ा, क्योंकि तेहरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया. यह कदम इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए कथित 'पूर्व-नियोजित' मिसाइल हमलों के बाद उठाया गया, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है.

हमले में तेहरान के ये हिस्से हुए प्रभावित 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में तेहरान के कुछ हिस्से प्रभावित हुए हैं, जिनमें अयातुल्ला अली खामेनेई के दफ्तरों के आसपास का इलाका भी शामिल बताया जा रहा है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उस समय 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अपने कार्यालय में मौजूद थे या नहीं. फिलहाल किसी भी तरह के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

बंद हुए हवाई क्षेत्र 

हमले के तुरंत बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया और जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच तेल अवीव में सायरन की गूंज भी सुनाई दी. इजरायल ने भी एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया. कुछ विश्वसनीय सूत्रों के माध्यम से इजरायली रक्षा अधिकारी ने बताया कि यह अभियान कई महीनों की योजना का हिस्सा था. इसे अचानक नहीं किया गया है.

परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता टकराव

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी थे. डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान से उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है. 

अमेरिका ने ईरान से स्थायी गारंटी की मांग की है कि वह अपने परमाणु भंडार को उस स्तर तक समृद्ध नहीं करेगा जहां इसका इस्तेमाल हथियार बनाने के लिए किया जा सके और साथ ही निरीक्षणों के लिए भी तैयार रहे.

इजराइल ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में तेहरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नष्ट करना शामिल होना चाहिए और इस मुद्दे पर उसने वाशिंगटन पर जमकर दबाव बनाया है. ईरान और अमेरिका ने इस मुद्दे पर फरवरी में बातचीत की थी लेकिन किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे.