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धोखेबाज पाकिस्तान की खुली पोल, अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता के नाम पर धोखा? ईरानी सैन्य विमानों को अपने देश में दिया पनाह!

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका में देखा गया. हालांकि रिपोर्ट में उनकी मध्यस्थता पर भी सवाल उठ रहा है.

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Edited By: Shanu Sharma
धोखेबाज पाकिस्तान की खुली पोल, अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता के नाम पर धोखा? ईरानी सैन्य विमानों को अपने देश में दिया पनाह!
Courtesy: ANI

अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान महान और शांति दूत बनने की एक्टिंग कर रहे पाकिस्तान की पोल अब दुनिया के सामने खुलती नजर आ रही है. रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध को खत्म कराने की कोशिश में जुटा पाकिस्तान छुप कर ईरान को मदद दे रहा था.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने अपने एयरफील्ड पर ईरान के मिलिट्री विमानों को पार्क करने की इजाजत दे थी. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने सिविलियन विमानों को अफगानिस्तान में पार्क करने के लिए भेजा था, ताकी इन विमानों को जंग के बीच बचाया जा सके.

ईरान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लगाया विमान?

रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर बात बनी तो उसके कुछ दिनों बाद ही ईरान ने नूर खान एयर बेस पर कई विमान भेजे थे. जिसमें ईरान वायु सेना का आरसी-130 टोही विमान भी शामिल था. हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा इन रिपोर्ट को पूरी तरह से झूठा बताते हुए खारिज किया गया है.

पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नूर खान एयर बेस शहर के ठीक बीच में स्थित हैं. यहां पर पार्क किए गए विमानों को छुपाना संभव ही नहीं है. वहीं अफगानिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने से कुछ समय पहले एक ईरानी सिविलियन विमान काबुल में उतारा गया था. हालांकि तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ने इस बात को मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया.

पाकिस्तान की भूमिका पर उठा सवाल

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ईरानी विमान के काबुल में पार्क होने के दावे पर कहा कि यह सच नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है. इन खबरों के बीच ईरान और अमेरिका के युद्ध में पाकिस्तान के मध्यस्थ की भूमिका पर एक बार फिर से सवाल उठने लगा है. रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि इसका पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए. उन्होंने पाकिस्तान पर भरोसा कम जताते हुए कहा कि अगर जांच में यह सच निकल जाता है तो यह ज्यादा हैरानी वाली बात नहीं होगी.