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कहां करें प्रदर्शन? जंतर-मंतर के बाद रामलीला मैदान में भी प्रोटेस्ट मुश्किल! एक दिन का खर्च 1.21 लाख

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे संगठनों के लिए अब जगह और बजट दोनों बड़ी चुनौती बन सकते हैं. जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद 3 जगहों को नए विकल्पों में शामिल किया गया है.

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Edited By: Reepu Kumari
कहां करें प्रदर्शन? जंतर-मंतर के बाद रामलीला मैदान में भी प्रोटेस्ट मुश्किल! एक दिन का खर्च 1.21 लाख
Courtesy: @Saurabh_MLAgk

अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए सड़कों पर उतरने वाले संगठनों और आम लोगों के सामने दिल्ली में प्रदर्शन स्थल चुनने की चुनौती बढ़ती नजर आ रही है. जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया गया है. ऐसे में दूसरे मैदानों का रुख करने वालों को जगह की उपलब्धता और खर्च का हिसाब भी लगाना पड़ सकता है.

जंतर-मंतर के बाद कहां होगा प्रदर्शन?

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है. इसके बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को विरोध प्रदर्शनों के लिए नए स्थलों के रूप में तय किया गया है. 

रामलीला मैदान में तारीखों का टोटा

रामलीला मैदान में प्रदर्शन आयोजित करने के इच्छुक लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी तारीखों की उपलब्धता है. दी गई जानकारी के मुताबिक, इस साल मैदान की बुकिंग के लिए केवल 29, 30 और 31 दिसंबर की तारीखें उपलब्ध हैं. 

एक दिन के लिए देने होंगे करीब 1.21 लाख रुपये

करीब 12 एकड़ में फैले रामलीला मैदान में लगभग 50,000 लोगों के बैठने की क्षमता बताई गई है. अधिकारियों के मुताबिक, इसकी बुकिंग फीस प्रतिदिन 50,000 रुपये है. इसके अलावा 55,000 रुपये की वापसी योग्य सुरक्षा राशि जमा करनी होती है. कर सहित एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च करीब 1.21 लाख रुपये बताया गया है. हालांकि, मैदान का एक छोटा हिस्सा लगभग 150 लोगों की क्षमता के साथ प्रदर्शन के लिए मुफ्त रखा गया है.

बुकिंग के लिए MCD और पुलिस की मंजूरी जरूरी

रामलीला मैदान की बुकिंग नगर निगम के बागवानी विभाग के माध्यम से की जाती है. आवेदन को मंजूरी मिलने से पहले दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना भी अनिवार्य है. वहीं, अधिकारियों का तर्क है कि मैदान को बिना शुल्क उपलब्ध कराने पर नगर निकाय को प्रतिदिन कम से कम 50,000 रुपये या उससे अधिक का नुकसान हो सकता है.

त्योहारों के कार्यक्रम और मैदान का ऐतिहासिक महत्व

रामलीला मैदान दशहरा, दिवाली और दूसरे बड़े आयोजनों के दौरान व्यस्त रहता है. अधिकारियों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में त्योहारों से जुड़े कार्यक्रमों के कारण मैदान पहले से आरक्षित है. यह इलाका व्यावसायिक गतिविधियों से भरा है और आसपास तीन बड़े अस्पताल तथा नगर निगम का मुख्यालय भी मौजूद हैं. बड़े आयोजनों से यातायात पर दबाव बढ़ता है. इतिहास में भी इस मैदान की अहम भूमिका रही है. वर्ष 1930 में तालाब को भरकर समतल किया गया था, ताकि यहां रामलीला का मंचन हो सके.