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ईरान के साथ फिर हुआ धोखा! शांति वार्ता में तेहरान को उलझा कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रंप ने चला शातिर चाल

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शातिर चाल चल दी है. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज भेज दिए हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
ईरान के साथ फिर हुआ धोखा! शांति वार्ता में तेहरान को उलझा कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रंप ने चला शातिर चाल
Courtesy: Grok AI

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में आयोजित शांति वार्ता फेल हो गई. 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद दोनों देश एक समझौते पर नहीं आ पाए, जिसके बाद अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपनी वापसी का ऐलान किया. हालांकि इस वार्ता के बीच डोनाल्ड ट्रंप की शातिर चाल की खबर सामने आई है. जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या शांति की आड़ में ईरान को एक बार फिर धोखा दिया गया?

मिल रही जानकारी के मुताबिक इस्लामाबाद में एक ओर वार्ता चल रही थी, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दो डेस्ट्रॉयर भेज दिए. अमेरिकी सेंटकॉम के अनुसार, USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं. इन जहाजों का मिशन क्षेत्र में लगी बारूदी सुरंगों को साफ करना बताया गया है.

अमेरिका और ईरान के बीच नहीं हुआ समझौता

इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में अमेरिका ने अपनी रेड लाइन स्पष्ट रूप से रखी, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने न्यूनतम शर्तों पर भी समझौता नहीं किया. वहीं ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने अनावश्यक और एकतरफा शर्तें थोपने की कोशिश की, जिससे बातचीत संतुलित नहीं रह सकी. हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका द्वारा किए जा रहे दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

तेहरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और बिना उसकी अनुमति के कोई भी विदेशी सैन्य जहाज वहां नहीं घुस सकता. ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिका की उकसावे वाली कार्रवाई बताया और चेतावनी दी कि ऐसी किसी भी गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. विश्लेषकों का मानना है कि बातचीत के दौरान सैन्य गतिविधियां बढ़ाना अमेरिका की दोहरी रणनीति का हिस्सा है एक तरफ शांति का दिखावा, दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाना.

ईरान के साथ पहले भी हुआ था धोखा

यह घटना 28 फरवरी की उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की याद दिलाती है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर तभी हमला किया था जब बातचीत जारी थी. उस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी. उस समय भी किसी को हमले की आशंका नहीं थी.