पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने भारत से एक अहम कूटनीतिक भूमिका निभाने की उम्मीद जताई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में कहा कि ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच को क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में आगे आना चाहिए. यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. बढ़ते तनाव और बदलते समीकरणों के बीच भारत के लिए यह स्थिति नई कूटनीतिक चुनौती बनती दिख रही है.
ईरान का कहना है कि मौजूदा हालात में ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए. अराघची ने बातचीत में कहा कि संगठन को क्षेत्र और दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए रचनात्मक कदम उठाने चाहिए. उनके अनुसार, यदि बड़े देश मिलकर पहल करें तो तनाव कम करने के रास्ते निकल सकते हैं. इस बयान के बाद ब्रिक्स की संभावित भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है.
ईरान की इस अपील ने भारत के सामने एक जटिल स्थिति खड़ी कर दी है. ब्रिक्स में हाल ही में कई नए देशों को शामिल किया गया है, जिनमें पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण देश भी हैं. ऐसे में भारत को अलग-अलग देशों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कोशिश होगी कि संगठन के भीतर किसी तरह का टकराव न बढ़े और संवाद का रास्ता खुला रहे.
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है. इस दौरान क्षेत्र में हो रही घटनाओं और संभावित कूटनीतिक कदमों पर चर्चा हुई है. भारत ने भी स्थिति पर चिंता जताते हुए शांति और बातचीत का समर्थन किया है. दोनों देशों के बीच यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्रीय हालात लगातार बदल रहे हैं.
भारत के लिए पश्चिम एशिया केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अहम क्षेत्र है. ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे कई मुद्दे इससे जुड़े हैं. इसलिए भारत कोशिश कर रहा है कि सभी पक्षों से संवाद बनाए रखते हुए संतुलित नीति अपनाई जाए. आने वाले समय में ब्रिक्स की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना भी जताई जा रही है.