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India Daily

ईरान का यू-टर्न! परमाणु भंडार छोड़ने को तैयार तेहरान, ट्रंप की डील से खत्म होगा मिडिल ईस्ट संकट?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में बड़ा मोड़ आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने पर सहमत हो गया है, जिससे मिडिल ईस्ट तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है.

KanhaiyaaZee
ईरान का यू-टर्न! परमाणु भंडार छोड़ने को तैयार तेहरान, ट्रंप की डील से खत्म होगा मिडिल ईस्ट संकट?
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत ने अचानक नया मोड़ ले लिया है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए सिद्धांत रूप में तैयार हो गया है. अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इससे न सिर्फ अमेरिका-ईरान रिश्तों में नरमी आ सकती है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य खतरे को भी कम करने में मदद मिल सकती है.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने अपने लगभग हथियार-स्तर के संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने पर सहमति जताई है. हालांकि, इसे किस तरीके से हटाया जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. आने वाले 30 से 60 दिनों में इस पर विस्तृत बातचीत होने की संभावना है. यह मुद्दा अब तक दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ था.

ट्रंप की पहल से तेज हुई बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि वॉशिंगटन और तेहरान एक बड़े समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. इस प्रस्तावित डील का मकसद क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सामान्य व्यापारिक गतिविधियों के लिए खोलना बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि इसी दबाव के बाद ईरान ने अपने रुख में नरमी दिखाई.

ईरान के पास कितना यूरेनियम?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास करीब 400 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम मौजूद है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसे आगे शुद्ध करके हथियार बनाने योग्य सामग्री में बदला जा सकता है. इजरायल लंबे समय से इस भंडार को अपने लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बताता रहा है.

सैन्य कार्रवाई की भी बनी थी योजना

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के भूमिगत परमाणु भंडार को निशाना बनाने के विकल्पों पर भी विचार किया था. इस्फहान परमाणु केंद्र को लेकर बंकर-बस्टर बमों के इस्तेमाल तक की चर्चा हुई. यहां तक कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कमांडो कार्रवाई का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन जोखिम ज्यादा होने की वजह से इसे मंजूरी नहीं मिली.

आर्थिक राहत भी होगी समझौते का हिस्सा

प्रस्तावित समझौते में ईरान की विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा भी शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, पुनर्निर्माण सहायता से जुड़े अधिकतर फंड अंतिम परमाणु समझौते के बाद ही जारी किए जाएंगे. अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन रोक दे, जबकि तेहरान कम अवधि की शर्त पर जोर दे रहा है.