नई दिल्लीः अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ी शर्त सामने रखी है. ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने साफ कर दिया है कि उनका देश 60% संवर्धित (Enriched) यूरेनियम को पतला करने पर विचार कर सकता है, लेकिन इसके लिए एक बहुत बड़ी शर्त है. उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लिए जाएं.
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद इस्लामी ने यह टिप्पणी शुक्रवार को ओमान में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के संदर्भ में हुई. पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि क्या अमेरिका ने 60% यूरेनियम को पतला करने की मांग की है. इस पर इस्लामी ने कहा, "इस मुद्दे (यूरेनियम को पतला करना) पर फैसला पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि वे बदले में सभी प्रतिबंध हटाएंगे या नहीं.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश में भेजने का कोई सवाल ही नहीं है. यह प्रस्ताव केवल उन लोगों द्वारा दिया गया है जो इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं, लेकिन यह ईरान के एजेंडे में नहीं है. साथ ही इस्लामी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) से मांग की है कि वह पिछले साल ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हुए हमलों की निंदा करे और अपने दायित्वों को पूरा करे.
दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने 1979 की इस्लामिक क्रांति की 47वीं सालगिरह से पहले देशवासियों से एकजुट होने की अपील की है. सोमवार को एक टेलीविजन संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरानियों को "दुश्मन को निराश" करना होगा. खामेनेई ने कहा, "राष्ट्रीय शक्ति केवल मिसाइलों और विमानों जैसे सैन्य हथियारों से नहीं आती, बल्कि यह दृढ़ संकल्प और प्रतिरोध पर निर्भर करती है." उन्होंने कहा कि जब तक दुश्मन को निराश नहीं किया जाता, एक राष्ट्र उत्पीड़न का शिकार रहता है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान बुधवार को क्रांति की जीत का जश्न मनाने के लिए देशव्यापी रैलियों की तैयारी कर रहा है.
गौरतलब है कि 1979 की इस्लामी क्रांति ने ईरान को एक पश्चिमी समर्थक राजशाही से इस्लामी गणराज्य में बदल दिया था. इसके बाद 1980 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंध टूट गए थे. हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत हुई, लेकिन मतभेद अब भी बरकरार हैं.