नई दिल्ली: जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के सामने आने के बाद दुनिया भर में सत्ता के गलियारों में भूचाल आ गया है. इन फाइलों में वित्तीय लेन-देन, ईमेल संपर्क और निजी मुलाकातों का विवरण सामने आया है. जैसे-जैसे नाम सामने आ रहे हैं, कई देशों में उच्च पदों पर बैठे लोग दबाव में आकर पद छोड़ रहे हैं. अमेरिका, ब्रिटेन, नॉर्वे और फ्रांस समेत कई देशों में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है.
एपस्टीन से जुड़े हजारों दस्तावेज सामने आने के बाद वैश्विक स्तर पर हलचल तेज हो गई है. इन रिकॉर्ड्स में ईमेल, फोटो और वित्तीय जानकारियां शामिल हैं, जो कई प्रभावशाली लोगों के साथ उसके संपर्क को दिखाती हैं. हालांकि इनमें से कई मामलों में अपराध सिद्ध नहीं हुए हैं, लेकिन सार्वजनिक दबाव इतना बढ़ा कि संस्थानों की साख बचाने के लिए कई लोगों ने इस्तीफा देना बेहतर समझा.
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया. उन पर एपस्टीन से जुड़े एक व्यक्ति की नियुक्ति की सिफारिश को लेकर सवाल उठे थे. वहीं नॉर्वे में वरिष्ठ राजनयिक मोना जूल ने भी पद छोड़ने का फैसला किया. उनके पुराने संपर्क सामने आने के बाद सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया था.
एपस्टीन फाइल्स का सबसे बड़ा असर अमेरिका में देखने को मिला. फरवरी 2026 में प्रमुख लॉ फर्म के चेयरमैन ब्रैड कार्प ने इस्तीफा दिया, जब उनके ईमेल कॉन्टैक्ट सार्वजनिक हुए. इससे पहले नवंबर 2025 में लैरी समर्स ने बोर्ड पद छोड़ा. दिसंबर 2025 में एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो ने भी विवाद के बीच पद से हटने का निर्णय लिया.
यूरोप के अन्य देशों में भी एपस्टीन फाइल्स का प्रभाव दिखा. फ्रांस में पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया. स्लोवाकिया में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिरोस्लाव लाजचाक और स्वीडन में एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी पद छोड़ा. इन सभी मामलों में संपर्क उजागर होना ही इस्तीफे की मुख्य वजह बना.