नई दिल्ली: ईरान और US के बीच चल रहा युद्ध दो अलग-अलग और महत्वपूर्ण हमलों के साथ निर्णायक रूप से हिंद महासागर तक पहुंच गया है. कुल मिलाकर यह युद्ध के भौगोलिक दायरे के विस्तार का संकेत है. US अधिकारियों के हवाले से एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने चागोस द्वीप समूह में डिएगो गार्सिया स्थित US-UK के संयुक्त सैन्य बेस पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं.
हालांकि, दोनों में से कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची. एक मिसाइल बीच हवा में ही नाकाम हो गई, जबकि दूसरी मिसाइल को US युद्धपोत से दागी गई एक इंटरसेप्टर मिसाइल द्वारा निशाना बनाया गया, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह मिसाइल उससे टकराई या नहीं. ईरान ने जिस द्विप पर स्थित बेस पर हमला किया है वह अमेरिका और ब्रिटेन के लिए बेहद ही जरूरी है.
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में एक छोटा सा द्वीप है. यह जगह बहुत खास है क्योंकि यहां अमेरिका और ब्रिटेन की बड़ी सैन्य बेस बना हुआ है. यह द्वीप ब्रिटेन का हिस्सा है, लेकिन असल में अमेरिका इसे चलाता है. यहां से बहुत बड़े हवाई जहाज और युद्धपोत तैयार रहते हैं. यह बेस अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के बड़े इलाके में सैन्य कामों के लिए इस्तेमाल होता है. रणनीतिक रूप से यह बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए दुनिया की कई बड़ी ताकतों की नजर इस पर रहती है.
यह बेस ईरानी क्षेत्र से लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. एक ऐसी दूरी जो तेहरान की पहले मानी जाने वाली क्षमताओं से कहीं अधिक बड़ी छलांग का प्रतिनिधित्व करती है. इसका अर्थ है कि ईरान अब यूरोप में स्थित सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने में सक्षम होगा. पेंटागन ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
डिएगो गार्सिया स्थित यह सैन्य बेस, अफगानिस्तान और इराक में चलाए गए अमेरिकी बमबारी अभियानों के लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में भी कार्य कर चुका है. यह उन दो ब्रिटिश सैन्य ठिकानों में से एक है, जिनका उपयोग US वर्तमान में उन अभियानों के लिए कर रहा है जिन्हें लंदन द्वारा ईरान के खिलाफ रक्षात्मक अभियान बताया गया है.