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India Daily

सड़कों पर लगी ताबूतों की कतारें, ईरान में प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार में दिखा दिल दहला देनेवाला मंजर

ईरान में सत्तारूढ़ शासन के खिलाफ दो हफ्तों से जारी जनआंदोलन हिंसक होता जा रहा है. सैकड़ों मौतें, हजारों गिरफ्तारियां और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है.

Kanhaiya Kumar Jha
सड़कों पर लगी ताबूतों की कतारें, ईरान में प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार में दिखा दिल दहला देनेवाला मंजर
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मध्य पूर्व का अहम देश ईरान इस समय गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रहा है. बीते दो सप्ताह से अधिक समय से देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. राजधानी तेहरान से लेकर छोटे शहरों तक सड़कों पर गुस्सा और शोक दोनों दिखाई दे रहे हैं. मानवाधिकार संगठनों के दावों के मुताबिक, हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और सुरक्षा बलों व आम नागरिकों के बीच टकराव तेज हो गया है.

ईरान में शुरू हुआ यह आंदोलन अब लगभग 200 शहरों तक फैल चुका है. अलग अलग सामाजिक संगठनों का दावा है कि अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबल दोनों शामिल हैं. करीब 10 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, जिससे सही जानकारी बाहर आना मुश्किल हो रहा है. इसके बावजूद विरोध की आवाज लगातार मजबूत होती दिख रही है.

तेहरान में मातम और आक्रोश

राजधानी तेहरान से सामने आ रही तस्वीरें बेहद विचलित करने वाली हैं. हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ताबूतों के साथ मार्च कर रहे हैं. ये लोग केवल अपने मृत परिजनों को विदाई नहीं दे रहे, बल्कि खुले तौर पर न्याय की मांग कर रहे हैं. अंतिम यात्राओं के दौरान गूंजते नारे यह दिखाते हैं कि डर के बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. यह दृश्य ईरानी समाज के भीतर गहरे असंतोष को उजागर करता है.

काहरिजाक सेंटर की दर्दनाक तस्वीर

तेहरान के काहरिजाक फोरेंसिक मेडिकल सेंटर के बाहर का दृश्य हालात की गंभीरता बयान करता है. यहां कई शव बॉडी बैग में बंद कर जमीन पर रखे गए थे. आसपास खड़े लोग अपनों की पहचान करने की कोशिश कर रहे थे. यह दृश्य न केवल पीड़ा से भरा था, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है. मृतकों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़े और सामाजिक संगठनों के दावे अलग अलग बताए जा रहे हैं.

सरकार बनाम जनता

ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और कई इलाकों में सख्ती लागू है. सरकार का कहना है कि देश में अशांति फैलाने की साजिश हो रही है. वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मूलभूत आजादी और सम्मान छीना जा रहा है. यह टकराव अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान की राजनीति के भविष्य पर सवाल बन गया है.

अंतरराष्ट्रीय तनाव और आगे की राह

इस आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि हिंसा जारी रही तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है. वहीं खामेनेई ने जवाबी कदमों की बात कही है. आने वाले समय में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह न केवल ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अहम होगा.