नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के रिश्तों में लंबे समय से जमी बर्फ पिघलने के संकेत मिले हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ परमाणु बातचीत फिर से शुरू करने का आदेश दिया है.
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक तनाव चरम पर है. अमेरिकी नौसेना की तैनाती, सख्त बयानबाजी और प्रतिबंधों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियान ने परमाणु संवाद को फिर से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि बातचीत पर आंतरिक स्तर पर सहमति बन रही है. लंबे समय से रुकी वार्ता को लेकर यह अबतक का सबसे स्पष्ट राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.
बीते हफ्तों में अमेरिका ने ईरान के पास अपने नौसैनिक बेड़े की तैनाती बढ़ाई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की धमकियां भी दी हैं. यह दबाव ईरान में हालिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उन पर हुई सख्त कार्रवाई के बाद और तेज हुआ.
ईरान में पिछले महीने हुए प्रदर्शन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे हिंसक माने जा रहे हैं. सरकार की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई. ट्रंप ने सीधे हस्तक्षेप से तो परहेज किया, लेकिन इसके बाद ईरान से परमाणु रियायतों की मांग तेज कर दी.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत के लिए तीन शर्तें रखी हैं. यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सीमित करना और पश्चिम एशिया में समर्थित गुटों को समर्थन रोकना. ईरान इन मांगों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता रहा है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बातचीत के सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है. तेहरान चाहता है कि प्रतिबंध जल्द हटे. मई 2023 से वार्ता ठप है. जून में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन फिलहाल रुका हुआ है. ऐसे में आने वाले हफ्ते निर्णायक हो सकते हैं.