नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से भारत का लगभग आधा तेल आयात होता है. हाल के ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण यह रास्ता बंद जैसा हो गया था, जिससे भारत में एलपीजी यानी खाना पकाने की गैस की सप्लाई पर असर पड़ा और संकट गहरा गया. ऐसे में पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से सीधी बात की और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा व ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह पर जोर दिया. बातचीत के बाद ईरान ने दो भारतीय जहाजों को रास्ता खोल दिया, जो बड़ी राहत की खबर है.
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच यह पहली फोन बातचीत थी, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष भी शामिल हुए. मोदी ने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सामान व ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को भारत ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. ईरानी पक्ष ने भी भारत के साथ दोस्ती और साझा हितों का जिक्र किया. राजदूत मोहम्मद फथली ने खुले तौर पर कहा कि ईरान और भारत मित्र हैं, हमारे हित और भाग्य जुड़े हुए हैं.
शुक्रवार को ईरानी राजदूत फथली ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा. उन्होंने कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है. दो-तीन घंटों में सकारात्मक खबर आने की उम्मीद जताई गई, जो सच साबित हुई. यह कदम भारत की सक्रिय कूटनीति का नतीजा है, जिससे ऊर्जा संकट से निपटने में आसानी हुई.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है और ज्यादातर आयात होर्मुज मार्ग से होता है. बंदी के कारण सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कीमतें बढ़ीं और लोग चिंतित हुए. इन दो जहाजों के गुजरने से घरेलू गैस सिलेंडर की उपलब्धता बेहतर होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में स्थिरता आएगी और आम आदमी को राहत मिलेगी.
सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार होर्मुज के पश्चिम में फंसे करीब दो दर्जन भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान से लगातार संपर्क में है. इनमें एलपीजी के अलावा क्रूड ऑयल वाले टैंकर भी शामिल हैं. एक अलग घटनाक्रम में सऊदी अरब से क्रूड तेल लेकर एक टैंकर शनिवार को भारत पहुंचने वाला है. कूटनीतिक बातचीत जारी रहने से बाकी जहाजों के लिए भी रास्ता खुल सकता है.
यह घटनाक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है. होर्मुज जैसे संवेदनशील मार्ग पर निर्भरता को देखते हुए भारत ने संतुलित रुख अपनाया और दोस्ती का रिश्ता बनाए रखा. इससे न सिर्फ तत्काल राहत मिली, बल्कि भविष्य में भी ऐसे संकटों से निपटने की उम्मीद बढ़ी है. सरकार की सक्रियता से आम लोगों को गैस की चिंता से कुछ फुरसत मिलेगी.